सामना संवाददाता / मुंबई
विधानसभा में रमी खेलने सहित किसानों के बारे में विवादास्पद बयान देने वाले कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे का खेल मंत्रालय दिया गया है। आम जनता में यह संभावना जताई जा रही थी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कोकाटे की मंत्रिमंडल से हकालपट्टी अवश्य की जाएगी। लेकिन कोकाटे का मंत्रिमंडल से हकालपट्टी न किए जाने के पीछे महायुति सरकार की छवि बचाने की बात बताई जा रही है।
बताया जाता है कि पूर्व कृषि मंत्री धनंजय मुंडे के कारण सरकार की छवि बहुत धूमिल हुई थी। इसके अलावा शिंदे गुट के संजय शिरसाट, योगेश कदम आदि मंत्रियों के कथित रूप से दिए गए विवादास्पद बयान, घोटाले इत्यादि के कारण महायुति सरकार की छवि जनता में पूरी तरह से धूमिल हो गई है। इस दरम्यान अगर कोकाटे की मंत्रिमंडल से हकालपट्टी की जाती तो सरकार की प्रतिभा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता। इसलिए फडणवीस ने कोकाटे की मंत्रिमंडल से हकालपट्टी नहीं की, ताकि सरकार और दादा दोनों की छवि बची रहे। ऐसी जानकारी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दी।
बता दें कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने माणिकराव कोकाटे से कृषि विभाग छीन लिया। उनकी जगह नए कृषि मंत्री के तौर पर दत्तात्रेय भरणे के नाम की घोषणा की गई है। चर्चा है कि कोकाटे को खेल विभाग देकर एक तरह से डिमोट कर दिया गया है। इस बीच चर्चा थी कि धनंजय मुंडे एक बार फिर कृषि विभाग पाने के लिए पैरवी कर रहे थे।
गौरतलब है कि धनंजय मुंडे से मुलाकात के बारे में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में मीडिया से बातचीत की। इस मौके पर उन्होंने दादा गुट के नेता धनंजय मुंडे की दो मुलाकातों की चर्चाओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुंडे मुझसे दो बार नहीं, बल्कि तीन बार मिले थे। तीनों बार वे अलग-अलग कारणों से मिले थे। इसके साथ ही उन्होंने बैठक के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह मुलाकात मंत्रिमंडल में वापसी के लिए नहीं थी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल के संदर्भ में धनंजय मुंडे के स्तर पर चर्चा नहीं होती है, बल्कि मंत्रिमंडल पर मेरे, दादा और एकनाथ शिंदे के बीच चर्चा होती है।
