सामना संवाददाता / मुंबई
अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने का फटका महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र में पड़ना तय माना जा रहा है। कृष्णा वैली चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष सतीश मालू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए २५ प्रतिशत आयात शुल्क से मिराज, कुपवाड़ सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाले निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा। इसके साथ ही इसका असर श्रमिकों पर भी पड़ेगा।
कुपवाड़ और मिराज औद्योगिक क्षेत्रों में संचालित १५ कारखानों द्वारा उत्पादित वस्तुओं का सीधे अमेरिका निर्यात किया जाता है। इससे लगभग ६०० करोड़ रुपए का कारोबार होता है, परंतु इस शुल्क में वृद्धि का इस उद्योग पर सीधा असर पड़ेगा। साथ ही दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में ५० कारखाने स्पेयर पार्ट्स बनाते हैं। इन कारखानों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। इस नए कर से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से १,५०० करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित होगा। यहां कपड़ा, फाउंड्री उद्योग में उत्पादित मशीन स्पेयर पार्ट्स, रबर और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए स्पेयर पार्ट्स बनाने वाली फैक्ट्रियां हैं और अमेरिका ने आयात शुल्क में २५ प्रतिशत की वृद्धि की है, जिसका असर इन निर्यातों पर पड़ेगा।
इसके सटीक परिणाम अगले आठ दिनों में सामने आएंगे और तब यह स्पष्ट होगा कि उद्यमी वैâसे प्रभावित होंगे। इस उद्योग में लगभग चार हजार श्रमिक हैं। अमेरिका द्वारा आयात शुल्क में वृद्धि से आय पर भी असर पड़ेगा और यह व्यवसाय केवल दो से चार प्रतिशत लाभ पर निर्भर रहता है। अमेरिका ने केवल भारत पर २५ प्रतिशत शुल्क लगाया है। हालांकि, हमारे पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए १९ प्रतिशत आयात शुल्क है। इसके कारण पड़ोसी देशों को माल सस्ती दरों पर उपलब्ध होगा इसलिए अमेरिकी आयातक पड़ोसी देशों का प्राथमिकता देंगे, जिससे भारतीय निर्यात पर बड़ा प्रभाव पड़ने का खतरा है, ऐसा मालू ने कहा।
