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मां नहीं, फिर भी दिया मां का प्यार…१६,८५४ माताओं ने दान किया दूध!

-सायन और कामा अस्पताल की ह्यूमन मिल्क बैंक से हजारों नवजातों को मिला जीवनदान

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई

मां का दूध नवजात शिशु के लिए सिर्फ पोषण नहीं, बल्कि जीवन की पहली सुरक्षा है। लेकिन कई माताओं को स्वास्थ्य कारणों से तो किसी को प्रसव उपरांत समस्याओं के चलते अपने बच्चे को दूध पिलाने का सौभाग्य नहीं मिलता है। ऐसे मासूमों के लिए सायन और कामा अस्पताल के ह्यूमन मिल्क बैंक मानवता के सच्चे मिसाल बनकर सामने आए हैं। पिछले १६ महीनों में १६,८५४ माताओं ने अपने मातृत्व का विस्तार करते हुए २,००० लीटर से भी अधिक दूध दान किया, जिसमें १,८१८ लीटर दूध से ६,५९७ नवजात शिशुओं का न केवल पेट भरा गया, बल्कि उनको इसे जीवनरक्षक पोषण के रूप में दिया गया। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि हर बूंद में बसती एक ममता की कहानी है।
सायन और कामा अस्पताल में स्थापित ह्यूमन मिल्क बैंक उन शिशुओं के लिए वरदान बन रहे हैं, जिनकी मां उन्हें स्तनपान नहीं करा पातीं। अस्पताल की विशेषज्ञ टीम द्वारा इलेक्ट्रिक ब्रेस्ट पंप के जरिए दानदात्री माताओं से दूध एकत्रित किया जाता है, फिर उसे पाश्चराइज कर सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जाता है। प्रयोग से पहले हर बैच की माइक्रोबायोलॉजिकल जांच की जाती है, ताकि दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। सायन अस्पताल के डीन डॉ. मोहन जोशी ने कहा कि दूध दान करने वाली हर मां समाज को यह संदेश देती है कि मातृत्व सिर्फ जैविक नहीं, भावनात्मक भी होता है। अपने बच्चे के बाद बचा हुआ दूध दान करके अनगिनत बच्चों को पोषण, जीवन और ममता दे रही हैं।
समाज को जोड़ने वाली ममता की कड़ी
कामा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पालवे ने कहा कि इस पहल से न सिर्फ हजारों बच्चों को पोषण मिल रहा है, बल्कि शिशु मृत्यु दर में भी गिरावट आई है। एक आंकड़े के अनुसार, स्तनपान के कारण बाल मृत्यु दर में १४ फीसदी की कमी आई है। यही कारण है कि ह्यूमन मिल्क बैंक जैसी पहलें सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा रही हैं।
समर्पण की इस मिसाल का विस्तार हो
सायन और कामा अस्पतालों की यह अद्भुत पहल बताती है कि जब चिकित्सा विज्ञान में करुणा जुड़ जाती है, तब वह सिर्फ इलाज नहीं करता, बल्कि जीवन गढ़ता है। ऐसे में जरूरत है इस प्रेरणा को और अस्पतालों को अन्य शहरों तक पहुंचाने की, ताकि हर नवजात को मां के दूध जैसे पोषण का अधिकार मिल सके।

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