मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिकवि, चित्रकार पंकज तिवारी को मिलेगा कला क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान

कवि, चित्रकार पंकज तिवारी को मिलेगा कला क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान

सामना संवाददाता / मुंबई

कवि, कलाकार एवं कला समीक्षक पंकज तिवारी को साहित्य एवं कला के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए सन 2025 का ‘सर्वोत्तम सम्मान’ प्रदान करने का फैसला किया गया है। यह सम्मान ‘गऊ भारत भारती’ की ओर से दिया जा रहा है। श्री तिवारी पिछले 20 वर्षों से कला एवं साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मुंगरा बादशाहपुर में हुआ था।

पंकज तिवारी के रचनाओं में गांव है, संस्कार, संस्कृतियों का विशाल फलक है, जीवन और मृत्यु के बीच का पूरा संसार है। रहस्यमय जीवन, संघर्षमय जीवन, खुशहाल जीवन, अच्छाइयां-बुराइयां सभी कुछ है जो निरंतर अलग-अलग कृतियों में प्रवाहित है, सही-गलत, अच्छा-बुरा, सुबह-शाम जैसे भावों को पटल पर रखने वाले कलाकार पंकज तिवारी के अधिकतर कृतियों का शीर्षक भी हाफ लाइफ इन्हीं सब गुणों को देखकर रखा जाता जान पड़ता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक का पूरा सफर इनके कृतियों में नजर आ जाता है। अधिकतर गहरे रंगों का प्रयोग इनकी विशेषता है पर उससे भी बड़ी विशेषता उसी गहरे में से झांकते अंजोर को आतुर प्रकाश का भी प्रयोग है। गहरी, घनेरी और डरावनी रात के बाद सुबह की जो उम्मीद है वो इनके कृतियों में भी साथ झलकती है।

बनारस और शक्तिनगर से कलाशिक्षा प्राप्त पंकज आजकल दिल्ली में ही अपने सृजनशीलता के साथ रमे हुए हैं। चित्रों के साथ-साथ पंकज कहानी, कविता, कला समीक्षा, फिल्म समीक्षा भी लिखते रहते हैं। गाँव पर आधारित परिवेश को लेकर मुंबई के यशोभूमि और सामना में इनका स्तम्भ भी प्रकाशित होता रहता है जो बहुत ही प्रसिद्ध है। इनके लेखन में भी गांव ही बसता है। भाषा शैली गजब की होती है। छोटी उम्र से ही रचना धर्मिता के तरफ इनका झुकाव हो गया था। ग्यारहवीं कक्षा में ही इन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी से प्रशस्ति पत्र भी प्राप्त हो चुका है उसके बाद से तो इनके सपनों में जैसे पंख से लग गए हों और निरंतर सृजनात्मक कार्यों में संलग्न रहने लगे। राज्य ललित कला अकादमी लखनऊ, सहित गाजीपुर, बनारस, जयपुर, कानपुर सहित तमाम छोटी-बड़ी प्रदर्शनियों में इनके चित्र प्रदर्शित होते रहे हैं। राष्ट्रीय ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित पुराना किला पर भी कैम्प में इनकी सहभागिता रह चुकी है। एस. सी. ई. आर. टी. नई दिल्ली के तरफ से आयोजित रंग-तरंग कैंप में भी पंकज की सहभागिता होती रही है। आइफेक्स में भी इनका वर्क प्रदर्शित हो चुका है।

अभी हाल ही में ‘एसंउ लाग बाटइ महाकुम्भ अइया’ गीत बहुत ही पसंद किया गया‌। गीत शुद्ध अवधी में लिखा हुआ है। इसी सावन में इनके द्वारा लिखित गीत ‘जै जै महाकाल’ जिसे देवव्रत झा जी ने गाया है लोगों द्वारा बहुत ही पसंद किया जा रहा है।

पंकज तिवारी की विशेषताएं:
– पंकज तिवारी की रचनाओं में गाँव, संस्कार, संस्कृतियों का विशाल फलक है।
– उनकी कृतियों में जीवन और मृत्यु के बीच का पूरा संसार है।
– रहस्यमय जीवन, संघर्षमय जीवन, खुशहाल जीवन, अच्छाइयाँ-बुराइयाँ सभी कुछ है जो निरंतर अलग-अलग कृतियों में प्रवाहित है।
– उनकी कृतियों में गहरे रंगों का प्रयोग एक विशेषता है, लेकिन उसी गहरे में से झांकते अंजोर को आतुर प्रकाश का भी प्रयोग है।

पंकज तिवारी की उपलब्धियां:
– राज्य ललित कला अकादमी लखनऊ, गाजीपुर, बनारस, जयपुर, कानपुर सहित तमाम छोटी-बड़ी प्रदर्शनियों में उनके चित्र प्रदर्शित हुए हैं।
– राष्ट्रीय ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित पुराना किला पर भी कैंप में उनकी सहभागिता रही है।
– एस. सी. ई. आर. टी. नई दिल्ली के तरफ से आयोजित रंग-तरंग कैंप में भी पंकज की सहभागिता होती रही है।
– आइफेक्स में भी उनका वर्क प्रदर्शित हो चुका है।

पंकज तिवारी की रचनात्मकता:

– पंकज तिवारी कविता, कहानी, कला समीक्षा, फिल्म समीक्षा भी लिखते हैं।
– गाँव पर आधारित परिवेश को लेकर मुंबई के यशोभूमि और दोपहर का सामना में उनका स्तम्भ भी प्रकाशित होता रहता है।
– उनके लेखन में भी गाँव ही बसता है और भाषा शैली गजब की होती है।

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