सूफी खान
ईरान और इजरायल जंग एक बार फिर शुरू हो चुकी है। बस महाज या मोर्चा बदला है। इस बार गाजा के लिए जंग यमन से हो रही है और मुमकिन है कि ये फिर ईरान की तरफ मुड़ जाए। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट का साफ कहना है कि ईरान में आईआरजीसी यानी पासदाराने इस्लाम के लोग इस वक्त यमन में पहुंच चुके हैं, क्योंकि जिस ताकत की मिसाइल यमन से इजरायल की तरफ जा रही हैं, वो बगैर ईरान की ताकत और गाइडेंस के मुश्किल है। हाल ही में यमन के अंसारुल्लाह ने इजरायल पर जुल्फिकार मिसाइल दागी थी, जुल्फिकार जैसी मिसाइल अगर यमन से इजरायल की तरफ दागी जा रही है तो ये तय है कि मिडिल ईस्ट में जंग का एक नया महाज या मोर्च खुल चुका है। जुल्फिकार मिसाइल का नाम हूतियों ने हजरत अली की तलवार के नाम पर रखा है, जिसे जुल्फिकार कहा जाता था।
जानकार कहते हैं कि रेजिस्टेंस या मुकावमत का कोई साथ दे या न दे लेकिन ईरान जरूर देगा और ईरान की प्रॉक्सी या हिमायती तंजीमें तो आज से नहीं, वर्षों से इजरायल के खिलाफ लड़ रही हैं, फिलिस्तीन को मस्जिद ए अक्सा को आजाद कराने के लिए। ईरान उन्हें मदद देता है, इसमें कोई दबी या छिपी बात नहीं है। मौजूदा सूरते हाल में जब हिजबुल्लाह को डिसआर्म करने की बात चल रही है, तब भी ईरान का डेलीगेशन वहां पहुंचा था। ईरानी सिक्योरिटी काउंसिल के अहम रुक्न अली लारीजानी जो सुप्रीम लीडर इमाम आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेहद खास हैं, उन्होंने लेबनान सरकार से बात की है जो इस वक्त हिजबुल्लाह को हथियार डलवाने के लिए बजिद हैं।
कहा जाता है कि ईरान अपनी रेजिस्टेंस फोर्सेस के लिए खड़ा हो जाता है। यमन में अंसारुल्लाह के साथ भी इस वक्त ईरान खड़ा हुआ है। जानकार मानते हैं कि यमन के मोर्चे से बड़ी लड़ाई छिड़ गई है और ये जंग अब और बढ़ेगी। ये भी तय है कि इसमें इजरायल के खिलाफ ईरान के हथियार इस्तेमाल होंगे। दरअसल फिलिस्तीन की आजादी या मस्जिद ए अक्सा की आजादी ईरान का ही कार्ड है, जिसमें यमन के हूती कूदे हैं। हिजबुल्लाह भी इसी के लिए लड़ रहा है। हमास का भी यही मकसद है और कहा जाता है कि ईरान समर्थक ४० से ज्यादा तंजीमें जो मिडिल ईस्ट के अलग-अलग मुल्कों में इस वक्त मौजूद हैं। ईरान के एक इशारे पर इजरायल पर एक साथ हमलावर हो सकती हैं। यही वजह है कि ईरान भी इनके साथ बराबरी से खड़ा होता है।
अब यमन के अंसारुल्लाह ने ईरान के बैक अप से इजरायल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है या यूं कहें कि जंग ईरान ही लड़ रहा है। माना जा रहा है कि यमन के अंसारुल्लाह लड़ेंगे और खूब लड़ेंगे। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट अशरफ जैदी कहते हैं कि यमन के अंसारुल्लाह या हूती जंगजू तो सिर पर कफन बांधकर निकल चुके हैं। वो अब पीछे हटने से रहे। हूती पिछले २ साल से इजरायल पर हमलावर हैं और ईरान के एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस के ये अहम स्तंभ तो पूरी तरह आक्रामक हैं।
