-दादा गुट में भी बढ़ी बेचैनी
सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा ने मुंबई मनपा चुनाव में प्लान बी ताबड़तोड़ लांच कर अपनी रणनीति साफ कर दी है। साटम को दी गई कमान के नेतृत्व में कोर टीम ने फुल थ्रॉटल चुनाव अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत हर बूथ पर पैनी नजर रखी जा रही है। महायुति में सीटों के बंटवारे से असंतुष्ट भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर स्थिति अनुकूल नहीं रही तो ‘एकला चलो’ का झटका देने से भी वह पीछे नहीं हटेगी। इस कदम ने शिंदे और दादा गुट में बेचैनी बढ़ा दी है और आगामी चुनावी रणभूमि में भूचाल आने की संभावनाओं को और तेज कर दिया है। हालांकि, आने वाले समय में क्या निर्णय लिया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
आगामी स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव की पृष्ठभूमि में सभी पार्टियों ने तैयारियों को गति दे दी है। विशेष रूप से मुंबई मनपा चुनाव पर सभी का ध्यान केंद्रित है। इस चुनाव को देखते हुए भाजपा ने मुंबई भाजपा का अध्यक्ष बदल दिया है। आशीष शेलार के हाथ से यह पद हटाकर विधायक अमित साटम को सौंपा गया है। नई ऊर्जा के साथ अमित साटम ने एक के बाद एक कोर टीम की बैठकें शुरू कर दी हैं। इन बैठकों से वे चुनाव की तैयारियों और स्थिति का जायजा ले रहे हैं, जिससे सभी की निगाहें उन पर टिकी हुई हैं। दूसरी ओर आने वाले समय में अमित साटम के नेतृत्व वाली बैठकें भाजपा की प्लान बी रणनीति हो सकती है। महायुति में सीटों के बंटवारे को लेकर यदि कोई पेच पैदा होता है या अपेक्षित सीटें नहीं मिलती हैं तो भाजपा अपने दम पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। यह संदेश इन बैठकों के माध्यम से दिया जा रहा है इसलिए आगामी दिनों में लिए जाने वाले फैसलों पर सभी की नजरें हैं।
पारंपरिक सीटों पर पड़ सकता है असर
इस स्थिति में महायुति में शामिल मित्र पक्षों शिंदे और दादा गुट में अस्थिरता दिखाई दे रही है। साल भर पहले हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को सफलता नहीं मिली थी, जबकि शिंदे और दादा गुट की कार्यप्रणाली भाजपा की उम्मीदों के अनुसार नहीं रही। ऐसे में यह देखा जा रहा है कि आगामी मनपा चुनाव में भाजपा स्वबल पर अधिक सीटें जीत सकती है या नहीं। पार्टी नेताओं को यह भी लग रहा होगा कि महायुति में बने रहने से उनकी पारंपरिक सीटों पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि कुछ क्षेत्रों में मित्र पक्षों के खिलाफ नाराजगी है।
