बुलाकी शर्मा, राजस्थान
‘आज थांरै नांव री गाळ्यां काढ़ीजी है मां… अबै हूं बीं साथै इसी करसूं कै बीं री मां रांड ई भूल नीं सकै।’
‘चोप्प,’ आंख्यां काढ़ता मांजी गरज्या, ‘युनिवर्सिटी रो प्रेजीडेंट हुय’र इयां बोलै इंदरिया। दूजां री मावड़ी नै गाळ्यां काढ़सी जणै दूजा थारी मावड़ी रो सनमान कियां करसी, बता?’
‘बो बिना वजह थांरै नांव री गाळ काढ़ी है। अबै हूं म्हारी कारस्तानी दिखासूं।’ बॉब-कट दाढ़ी हथाळी सूं रगड़तो इंदर कैयो।
‘कारस्तानी करण में तो तूं अगाड़ी रैयो है बेटा। टाबरपणै सूं थारी शिकायतां सुणतां-सुणतां म्हारा कान पाकग्या। गलती करै खुद, इलजाम लगावै शिकायत करणियै रै। आज फेर कुण गाळ काढ़ दी तन्नै।’
‘राजियो है नीं। प्रेसिडेंट इलेक्शन में मात खायां पछै बो युनिवर्सिटी रो माहौल बिगाड़ रैयो है।’
मांजी हांस्या, ‘माहौल बिगाड़न में तो थारी उस्तादी है इंदर। राजेंदर तन्नै नावड़ ई नीं सवैâ। बो थारै ऊपरां आरोप लगा सकै पण म्हारै नांव री गाळ कोनी काढ़ सकै… मां नै तो साची बात बताय दे।’
इंदर चिड़तो बोल्यो, ‘राजियै युनिवर्सिटी कैम्पस में म्हारै विरोध में सभा करी। बठै लाग्योड़ै माइक सूं गाळ काढ़ीजी जणै दोसी राजियो है कै नीं, बतावो?’
‘राजेंदर मंच माथै हो कै?’
‘कोनी हो पण मंच तो बो ही हो नीं।’
मांजी बोल्या, ‘साबास, झूठी बातां घड़नी ओजूं बंद कोनी करी। तूं खुद री मौज-मस्ती में रैवै। युनिवर्सिटी रै छोरा-छोरियां री फीस कमती करावण कै बां रै रैवास सारू कोसीस कोनी करै। मास्टर पीरियड लेवै कै नीं, नूंवा सब्जेक्ट खुलै कै नीं इण री चिंत्या ई कोनी करै। म्हासूं मिलण सारू ई छठै-छमास आवै पण म्हारै नांव री गाळ आज थासूं मिलण रो मोकौ देय दियो।’
इंदर रीस में बोल्यो, ‘अबै हूं राजियै सूं माफी मंगवावण सारू युनिवर्सिटी अर कॉलेजां में हड़ताल करवासूं।’
मांजी चिंतित हुयग्या, ‘छोरा-छोरियां री पढ़ाई क्यूं चौपट करावै इंदर। म्हनैं थारो भायलो छोटू बतायो कै गाळ काढ़णियो थारी टीम रो ई कोई छोरो हो। रीस बीं माथै काढ़, टाबरां रो भविस क्यूं खराब करै।’
‘हूं तो राजियै रै विरोध में थां सूं स्टेटमेंट दिरावण नै आयो हो पण थे तो उपदेश देवण लागग्या। थां नै म्हारी नीं, युनिवर्सिटी अर कॉलेज रै स्टूडेंट्स रै भविस री चिंत्या है। जबरा मां हो।’ रीस में इत्तो कैय’र मांजी रा पांव धोक करियां बिना ई इंदर बठै सूं रवाना हुयग्यो।
