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रेलवे पुलिस के वसूली गैंग में आला अधिकारी भी शामिल!..यात्रियों को लूटने के लिए मुखबिरों का हो रहा है इस्तेमाल

सामना संवाददाता / मुंबई

पिछले कुछ महीनों में शहर के कई रेलवे स्टेशनों पर रेलवे पुलिसकर्मियों द्वारा आम यात्रियों को धमकाकर उनसे वसूली करने के मामले बढ़ गए थे। रेलवे पुलिस के एक सूत्र ने बताया कि इस वसूली गैंग में आला दर्जे के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि कांस्टेबल रैंक के पुलिसकर्मी उच्च अधिकारियों की इजाजत के बिना इतना बड़ा रैकेट चलाए यह संभव नहीं है। इसमें कुछ जीरो पुलिस भी शामिल है यानी यह कोई पुलिस वाले नहीं बल्कि पुलिस के मुखबिर होते हैं, जिनसे वसूली कराई जाती है।
बता दें कि बीते महीने वसूली करने के आरोप में वरिष्ठ निरीक्षक सहित १३ जीआरपी कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। एक अधिकारी ने बताया कि यह रैकेट मुंबई और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर सक्रिय था। खासकर, उन स्टेशनों पर जहां लंबी दूरी की ट्रेनें आती हैं। जैसे मुंबई सेंट्रल, दादर, एलटीटी, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली, ठाणे, कल्याण और पनवेल। निशाना ज्यादातर लंबी दूरी के यात्री होते थे, जो कीमती सामान लेकर चलते थे और शिकायत दर्ज कराने से बचना पसंद करते थे। पीड़ित वे यात्री होते थे जो नकद या कीमती सामान के साथ सामान-जांच बिंदुओं पर पकड़े जाते थे। उन्हें किसी वरिष्ठ अधिकारी से मिलने के लिए कहा जाता और प्लेटफॉर्म पर स्थित उन जीआरपी कक्षों में ले जाया जाता, जहां सीसीटीवी वैâमरे नहीं होते। वहां उनसे यह साबित करने को कहा जाता कि नकदी या आभूषण वास्तव में उनके ही हैं। इसके बाद यात्रियों को धमकाया जाता कि उनका सामान जब्त कर लिया जाएगा और उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा।
‘जीरो पुलिस’ का भी उपयोग
अधिकारियों के अनुसार, इस भ्रष्टाचार में जीरो पुलिस का भी उपयोग किया जाता है। जीरो पुलिस ऐसे स्वयंसेवक होते हैं जो पुलिस की मदद करते हैं, लेकिन यह कोई मान्य या आधिकारिक पद नहीं है। वे पुलिस जैसी वर्दी और तौर-तरीकों की नकल करते हैं और गवाह या मुखबिर की तरह इस्तेमाल किए जाते हैं। कई बार उनसे वसूली भी कराई जाती है। हालिया मामले में १ सितंबर को १०.३० लाख रुपए की वसूली में गिरफ्तार किए गए दो लोग जीरो पुलिस थे।

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