मुख्यपृष्ठनए समाचारअंधेरी स्टेशन के बाहर सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा खतरे में!

अंधेरी स्टेशन के बाहर सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा खतरे में!

-सिलिंडर का इस्तेमाल करनेवाले फेरीवालों पर मनपा नहीं कर रही कार्रवाई

-स्थिति बड़ी दुर्घटना को दे रही दावत

द्रुप्ति झा / मुंबई

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि सड़क या फुटपाथ पर सिलिंडर व चूल्हे के साथ दुकानें लगाना मना है। फिर भी अंधेरी रेलवे स्टेशन के बाहर फेरीवालों द्वारा धड़ल्ले से गैस सिलिंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। अंधेरी स्टेशन पर सैकड़ों लोगों की भीड़ के बीच लोडेड सिलिंडर वाहन से फेरीवालों को सिलिंडर पहुंचाते गैसवाले को देखकर रेलवे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगा है। यात्रियों का सवाल है कि कहीं मुंबई मनपा किसी बड़े हादसे का इंतजार तो नहीं कर रही है।
बता दें कि शहर की मुख्य सड़कों व फुटपाथों पर फेरीवालों के अतिक्रमण पर मनपा का कोई भी एक्शन नहीं दिख रहा है। विशेषकर सड़क या फुटपाथ पर सिलिंडर लगाकर खान-पान की दुकान चलानेवालों पर प्रतिबंध होने के बावजूद शहर में जगह-जगह अवैध फास्ट फूड की दुकानें धड़ल्ले से चल रही हैं।
धारावी हादसे से नहीं लिया कोई सबक
मार्च के महीने में मुंबई का धारावी इलाका उस वक्त दहल उठा था, जब एक ट्रक में रखे एलपीजी सिलेंडरों में एक के बाद एक कई विस्फोट हुए। चारों ओर आग की लपटें पैâल गर्इं और काला धुंआ दूर तक दिखाई दिया। फिर भी इस तरह सिलिंडर का इस्तेमाल करने वाले फेरीवालों पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।
मनपा उड़ा रही है आदेश की धज्जियां
इस तरह से मनपा द्वारा कोर्ट के निर्देश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कोर्ट आदेश के मुताबिक, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का अवैध इस्तेमाल और उनकी ब्लैक मार्वेâटिंग दंडनीय अपराध है। घरेलू गैस सिलिंडरों का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए करना या उन्हें बेचना या खरीदना गैरकानूनी है, इसके लिए सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में दुकानदार को सजा होनी चाहिए।
राष्ट्रीय समाज रक्षा संस्थान के सदस्य डॉ.हरीश शेट्टी ने विरोध के साथ अफसोस जताते हुए कहा है कि ये कोर्ट के आदेश का अपमान है। मनपा अधिकारी किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं क्या? हादसा होने के बाद भी इनकी आंखे नहीं खुलती हैं। इसके लिए मनपा अधिकारी, पुलिस और अग्निशमन दल ये तीनों जिम्मेदार हैं। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोई हादसा होने से पहले ही कड़ा कदम उठाना चाहिए। अन्यथा मुझे सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में प्रशासनिक लापरवाही का यह मामला लाना पड़ेगा।

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