-महायुति सरकार के निर्देश पर २५० करोड़ की ‘बीओटी’ का र्निणय
सामना संवाददाता / मुंबई
कल्याण-डोंबिवली मनपा ने अपने राजस्व स्रोतों को बढ़ाने के लिए बीस साल पहले कल्याण और डोंबिवली शहर के विभिन्न हिस्सों में लगभग २५० करोड़ रुपए की ‘बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (बीओटी) परियोजना स्थापित करने का निर्णय लिया था। इन परियोजनाओं के टेंडर से लेकर परियोजना के निर्माण तक के कार्यों में कई अनियमितताएं सामने आर्इं थीं। इस मामले में प्राप्त शिकायत के अनुसार, सरकार ने जांच में मनपा के कुल ३५ अधिकारियों को आरोपी बनाया था और उनकी विभागीय जांच के आदेश दिए थे। बताया जाता है कि पिछले बीस वर्षों से यह मामला लालफीताशाही में दबा हुआ था। सरकार के निर्देश पर मनपा ने २५० करोड़ की बीओटी परियोजना को धूल में मिलाने के मामले में आरोपी ३५ अधिकारियों को बरी कर दिया।
गड़बड़ी की शुरुआत
सरकार से शिकायत की गई थी कि इन परियोजनाओं की निविदा और ठेकेदारों की नियुक्ति में बड़ी गड़बड़ी हुई है। शिकायतों की जांच ठाणे के तत्कालीन जिला प्रशासनिक अधिकारी नंदकिशोर बुराडे ने की थी। जांच में पाया गया कि निविदा प्रतिस्पर्धी तरीके से आयोजित नहीं की गई थी। इसमें मनपा के वित्तीय हितों का ध्यान नहीं रखा गया। जांच अधिकारियों ने इस सारी निष्क्रियता के लिए बीओटी परियोजना को लापरवाही से चलाने वाले मनपा अधिकारियों को दोषी ठहराया था। यह रिपोर्ट कोकण संभाग के तत्कालीन संभागीय आयुक्त जगदीश पाटील ने सरकार को सौंपी थी। इसके बाद महाराष्ट्र सिविल सेवा अनुशासन नियमों के अनुसार, मनपा ने ३४ अधिकारियों को विभागीय जांच के लिए नोटिस भेजा था। ३४ अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि इस मामले में अनियमितताओं से उनका कोई संबंध नहीं है। मनपा प्रशासन ने मनपा अधिकारियों के खुलासे को सरकार को भेज दिए थे। खुलासों को देखने के बाद सरकार के निर्देश पर इस मामले के अधिकारियों को धीरे-धीरे विभागीय जांच से बरी कर दिया गया।
