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आउट ऑफ पवेलियन : योग के नाम पर भोग तंत्र

अमिताभ श्रीवास्तव

योग के नाम पर भोग परोसा जाए तो यह भारतीय संस्कृति को बदनाम करने की साजिश ही कही जाएगी। विदेशों में ऐसा ही प्रयास हो रहा है। योग किसी भी दृष्टि में सेक्स नहीं है पहली बात समझ लेनी होगी इसलिए जो भी इसे सेक्स से जोड़ता है वह निश्चित रूप से मानसिक रोगी है। अब देखिए न योग के एक ब्रिटिश शिक्षक को कथित तौर पर १० पाउंड प्रति सत्र में तांत्रिक सेक्स कक्षाएं पढ़ाने के बाद गिरफ्तार किया गया है। दावा किया जा रहा है कि थाईलैंड में पुलिस ने मारिया शचेटिनिना को एक लोकप्रिय रेस्तरां के पीछे अपनी कक्षाएं लेते वक्त तथा बिना वैध वर्क परमिट के हिरासत में लिया है। पुलिस ने पिछले दिनों कोह फांगन के रेस्तरां पर छापा मारा था। स्थानीय रिपोर्टों में कहा गया है कि उन्होंने लोकप्रिय बैकपैकर द्वीप पर साप्ताहिक ‘तंत्र’ कक्षाओं को कथित रूप से बढ़ावा देने वाले एक विज्ञापन को देखा, जहां प्रसिद्ध फुल मून पार्टी आयोजित की जाती है। बोला गया कि तांत्रिक सेक्स एक योग अभ्यास है जो बेहतर सेक्स प्राप्त करने के लिए शारीरिक मुद्राओं, सांस लेने, जप और ध्यान को मिलाता है। मारिया कथित तौर पर सत्रों की पेशकश कर रही थी, जिसे स्थानीय लोगों द्वारा ‘सेक्स योग’ के रूप में डब किया गया था। विदेशी पर्यटकों को प्रति व्यक्ति वह मोटी रकम ले रही थी। योग के नाम पर यौन अभद्र हरकतों की जांच के बाद उसे पकड़ा गया।
रेणुका के हाथ में किसका टैटू था?
हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों से निकली वह लड़की आज टीम इंडिया की सफल खिलाड़ी बन कर विश्वकप विजेता टीम की शान बढ़ा रही है। एक छोटे से गांव से निकली उस लड़की ने मरणोपरांत एक पिता का सपना पूरा किया है। जी हां, भारत की पहली महिला विश्व कप जीत की सूत्रधारों में से एक, रेणुका सिंह ठाकुर ने अपने दिवंगत पिता केहर सिंह ठाकुर की क्रिकेट की ख्वाहिशों को पूरा किया है, जिनका निधन तब हुआ था जब वह सिर्फ तीन साल की थीं। खेल के प्रति पिता की लगन इतनी गहरी थी कि उन्होंने अपने पहले बच्चे का नाम पूर्व भारतीय बल्लेबाज विनोद कांबली के नाम पर विनोद ठाकुर रखा था। लेकिन आगे चलकर उनकी बेटी रेणुका ने ही उनके इस सपने को साकार किया। उनकी मां सुनीता ठाकुर के अथक प्रयास और कड़ी मेहनत का नतीजा था कि आज रेणुका एक सफल गेंदबाज हैं। सुनीता ने बताया, ‘रेणुका को हमेशा से क्रिकेट का शौक था और वह बचपन से ही लड़कों के साथ यह खेल खेलती थी। छोटी उम्र में, वह सड़क किनारे कपड़े से गेंदें बनाकर लकड़ी के बल्ले से खेलती थी। मेरे पति को क्रिकेट बहुत पसंद था और वे चाहते थे कि कोई एक बच्चा खेल या कबड्डी में शामिल हो। हालांकि वह हमारे साथ नहीं हैं, मेरी बेटी ने उनके सपने पूरे किए हैं।’ रेणुका उस भावना को अपने साथ मैच में भी ले गर्इं, तथा अपने हाथ पर अपने दिवंगत पिता के नाम का टैटू बनवाकर मैदान में उतरीं। यह उस व्यक्ति के प्रति श्रद्धांजलि थी, जिनका क्रिकेट के प्रति प्रेम आज भी उनके माध्यम से जीवित है।
(लेखक वरिष्ठ खेल पत्रकार व टिप्पणीकार हैं।)

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