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मुस्लिम वर्ल्ड : सऊदी के सलमान अमेरिका में क्यों बाहर आया खाशोगी हत्याकांड का जिन्न?

सूफी खान

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद अमेरिका में हैं। १८ नवंबर को उनकी प्रेसिडेंट ट्रंप से अहम मुलाकात हुई। साल २०१८ के बाद ये सऊदी प्रिंस की पहली अमेरिका यात्रा है। करीब ८ साल बाद मोहम्मद बिन सलमान अमेरिका में है। लेकिन इस दौरान एक विवाद भी उनके साथ जुड़ा था जिसको लेकर अमेरिका भी काफी नाराज रहा था। वो मामला था सऊदी के सीनियर जर्नलिस्ट और वॉशिंगटन पोस्ट जैसे अमेरिकी अखबार में सेवाएं दे रहे जमाल खाशोगी की हत्या का मामला।
मोहम्मद बिन सलमान यानी एमबीएस पर आरोप लगा था कि उनके आदेश से ही पत्रकार जमाल खाशोगी का कत्ल कर दिया गया था। वो भी तुर्की के इस्तांबुल में मौजूद सऊदी एंबेसी के भीतर। हालांकि एमबीएस इससे इनकार करते रहे हैं। साल २०१८ में हुए इस मामले ने दुनिया को हिला दिया था। अमेरिका भी इसको लेकर सऊदी सरकार से खासा नाराज था।
जमाल खाशोगी ने एक प्रमुख सऊदी पत्रकार के रूप में कई सऊदी न्यूज एजेंसियों के लिए अफगानिस्तान पर सोवियत आक्रमण और अल-कायदा के ओसामा बिन लादेन के उदय सहित प्रमुख कहानियों को कवर किया। ५९ साल के खाशोगी सऊदी शाही परिवार के करीबी रहे और उन्होंने सरकार के सलाहकार के रूप में भी काम किया था।
२०१७ में खाशोगी अमेरिका चले गए। वहां से वॉशिंगटन पोस्ट में एक मासिक कॉलम में वो किंग सलमान के बेटे और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नीतियों की आलोचना करते थे।
मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि खाशोगी पहली बार २८ सितंबर २०१८ को तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास गए थे, ताकि वे सऊदी दस्तावेज प्राप्त कर सकें, जिसमें कहा गया था कि वो तलाकशुदा हैं, ताकि वे अपनी तुर्कीश मंगेतर हैटिस सेंगिज से शादी कर सकें। लेकिन उन्हें बताया गया कि उन्हें दस्तावेज लेने के लिए वापस आना होगा और उन्होंने २ अक्टूबर को वापस आने का प्रबंध किया।
बाद में उनकी मंगेतर ने मीडिया को बताया था कि ‘उन्हें विश्वास नहीं था कि तुर्की की धरती पर कुछ बुरा हो सकता है।’ कहा जाता है कि सेंगिज २ अक्टूबर को उनके साथ सऊदी वाणिज्य दूतावास के प्रवेश द्वार तक गईं। सीसीटीवी फुटेज में उन्हें आखिरी बार स्थानीय समयानुसार दोपहर १:१४ बजे इमारत में प्रवेश करते हुए देखा गया था। फिर जमाल खाशोगी वापस नहीं लौटे। आरोप लगता है कि सऊदी एंबेसी में पहले से मौजूद हत्यारों ने पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या कर दी और उनके शव के टुकड़े करके स्थानीय लोगों की मदद से गायब करवा दिया गया।
इस वारदात की खबर ने दुनिया को हिला दिया था और शक की सुई सऊदी हुकूमत और क्राउन प्रिंस की तरफ गई। लेकिन एमबीएस ने पत्रकार की हत्या में किसी भी तरह का आदेश देने के आरोपों से हमेशा इनकार किया है। अब ८ साल बाद अमेरिका और सऊदी दोनों देश इस मामले को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने को तैयार दिख रहे हैं।
दरअसल, सऊदी अरब को सऊदी से न्यूक्लियर अंबरेला चाहिए जी हां परमाणु छतर। इसके मायने हैं कि सऊदी को अमेरिका से वो ही गारंटी चाहिए जो जापान और साउथ कोरिया को मिली हुई है। इसके मुताबिक अगर सऊदी पर कोई भी हमला होता है या उसके खिलाफ किसी भी मुल्क ने न्यूक्लियर हथियार इस्तेमाल किए तो इसके जवाब में सऊदी के लिए न्यूक्लियर पलटवार अमेरिका करे। ये एक ऐसी डिमांड है, जिसके लिए अमेरिका को राजी करना टेढ़ी खीर भी है। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी को एफ-३५ फाइटर जेट देने का एलान कर दिया है। सऊदी प्रिंस के अमेरिका पहुंचने से पहले ही ट्रंप ने यह घोषणा कर दी। कहा जा रहा है कि सऊदी को एफ-३५ मिलने से इजरायल के साथ मिडिल ईस्ट में शक्ति संतुलन बन पाएगा।

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