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शंकरगढ़ में वाहन चेकिंग के दौरान युवक की पिटाई का आरोप…कार्यवाहक उपनिरीक्षक और पीड़ित के अलग-अलग दावे

राजेश सरकार / प्रयागराज

शंकरगढ़ थाना अंतर्गत नारीबारी पुलिस चौकी पर देर रात एक कार्यवाहक उपनिरीक्षक और जेसीबी चालक के बीच हुए विवाद का मामला गरमा गया है। पीड़ित युवक ने पुलिसकर्मी पर वाहन चेकिंग के नाम पर मारपीट करने और अभद्र व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि नियमानुसार वाहन सीज करने की कार्रवाई की गई थी।
क्या है पूरा मामला?
कपड़ौरा गांव निवासी बृजेश सिंह (पुत्र रामसनेही सिंह) का आरोप है कि शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि करीब 2 बजे वह नारीबारी स्थित एक भोजनालय में खाना खाकर अपने घर लौट रहा था। जैसे ही वह नारीबारी चौराहे पर पहुंचा, वहां मौजूद कार्यवाहक उपनिरीक्षक (मुनेश सिंह) ने उसे रोक लिया और देर रात बाहर रहने का कारण पूछा। पीड़ित के अनुसार जब उसने बताया कि वह जेसीबी मशीन चलाता है और काम में देरी होने के कारण खाना खाकर घर जा रहा है, तो पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट शुरू कर दी। मारपीट से युवक को चोटें आईं और वह काफी भयभीत हो गया।
पुलिस का पक्ष
इस मामले में शंकरगढ़ के थाना प्रभारी सुशील दुबे ने पीड़ित के आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि देर रात नारीबारी इलाके में पुलिस वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान उपनिरीक्षक मुनेश सिंह ने एक चार पहिया वाहन रोककर दस्तावेजों की जांच की। कागजात और औपचारिकताओं में कमी पाए जाने पर नियमानुसार वाहन को सीज करने की कार्रवाई की गई है। पुलिस का साफ कहना है कि मारपीट जैसी कोई घटना नहीं हुई है।
उच्च अधिकारियों तक पहुंची शिकायत
इस सनसनीखेज घटना के बाद पीड़ित ने सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) बारा, वेद व्यास मिश्रा से संपर्क कर मामले की लिखित शिकायत की है। पीड़ित ने निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। एसीपी ने मामले की गहन जांच कर आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

मामले में चल रही विभागीय कार्रवाई
एसीपी स्तर पर जांच: एसीपी बारा ने पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।
बयानों का मिलान: घटना स्थल के आसपास मौजूद गवाहों और भोजनालय के कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
फुटेज खंगालना: नारीबारी चौराहे और आसपास लगे कैमरों की फुटेज निकाली जा रही है। ताकि रात दो बजे की असल हकीकत सामने आ सके।
क्या कहता है कानून?
जांच में पुलिसकर्मी पर लगे मारपीट के आरोप सही पाए जाते हैं या फिर यदि युवक ने पुलिस के काम में बाधा डाली थी तो भारतीय न्याय संहिता के तहत निम्नलिखित धाराएं प्रभावी हो सकती हैं। यदि जांच में साबित होता है कि उपनिरीक्षक ने बिना वजह मारपीट की, तो उन पर कार्रवाई हो सकती है। पद का दुरुपयोग और अभद्र व्यवहार, लोक सेवक द्वारा अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करने पर विभागीय निलंबन और लाइन हाजिर की कार्रवाई तय है।यदि वाहन चेकिंग में नियमों का उल्लंघन था तो पुलिस पक्ष से मोटर वाहन अधिनियम यदि गाड़ी के दस्तावेज अधूरे थे, तो पुलिस को धारा 207 के तहत वाहन सीज करने का पूरा अधिकार है। यदि चेकिंग के दौरान युवक ने पुलिस से उलझने या कागजात दिखाने से मना किया था, तो पुलिस नियमों के तहत कार्रवाई रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपती है।
पुलिस गाइडलाइंस
उत्तर प्रदेश पुलिस के दिशा-निर्देशों के अनुसार देर रात चेकिंग के दौरान पुलिस को नागरिकों से शालीनता और विनम्रता से पेश आना अनिवार्य है। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति से केवल पूछताछ की जा सकती है, मारपीट या शारीरिक प्रताड़ना पूरी तरह गैर-कानूनी है। यदि कोई वाहन चालक सहयोग नहीं करता, तो पुलिस केवल कानूनी चालान या सीजिंग की कार्रवाई कर सकती है। इस मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि नारीबारी चौराहे पर उस रात कानून का पालन हुआ था या अधिकारों का उल्लंघन।

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