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पुरवैया हवा और आर्द्रता ने बिगाड़ा मानसून का खेला…उमस से परेशान लोगों की नींद भी हुई हराम

राजेश सरकार / प्रयागराज

संगम नगरी में रविवार दोपहर बाद से मौसम ने करवट ली और शहर समेत जिले के गंगा और यमुनापार में कुछ देर बारिश हुई लेकिन उमस कायम है। घरों से बाहर निकलने पर ठंडी हवाएं महसूस हुई लेकिन घरों के अंदर भयानक उमस बनी हुई है। रविवार को जहां आसमान में बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर हो रही फुहारों के बीच भारी उमस और गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है। शहर का अधिकतम तापमान 39°C से 40°C के बीच बना हुआ है और हवा में भारी नमी के कारण भीषण चिपचिपी गर्मी महसूस हो रही है।
उमस और गर्मी से बेहाल संगम नगरी
संगम नगरी प्रयागराज में पिछले कुछ दिनों से प्री-मानसून और मानसून पूर्व की गतिविधियों ने मौसम को पूरी तरह से उमस भरा बना दिया है। धूप और बादलों के बीच लुकाछिपी का खेल जारी है। दिन भर चलने वाली पुरवैया हवाएं वातावरण में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) को बढ़ा रही हैं, जिसके कारण वास्तविक तापमान से अधिक ‘फील’ या अहसास हो रहा है। दोपहर के समय धूप खिलने पर उमस इतनी बढ़ जाती है कि घरों में कूलर और पंखे भी बेअसर साबित हो रहे हैं।
आसमान में बादलों का डेरा, बारिश ने दी दस्तक
गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर यह है कि शहर के कई इलाकों में रुक-रुक कर हल्की बारिश और बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया है। सड़कों पर आवागमन के दौरान लोगों को बारिश का सामना करना पड़ा है। मौसम विभाग के अनुसार, प्री-मानसून और मानसून के प्रभाव से शहर में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की पूरी संभावना बनी हुई है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
आने वाले 24 से 48 घंटों के दौरान मौसम विभाग ने प्रयागराज और इसके आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई है। हालांकि, बारिश होने के बावजूद बादलों की मौजूदगी और नमी के कारण उमस का यह सिलसिला अभी कुछ दिनों तक जारी रहने का अनुमान है।
स्वास्थ्य पर रखें ध्यान
भीषण गर्मी और उमस के इस बदलते मौसम में चिकित्सकों ने डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और वायरल बुखार जैसी समस्याओं से बचने की सलाह दी है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों (पानी, नींबू पानी, ओआरएस) का सेवन करें और धूप में निकलते समय छाता या सिर ढक कर ही बाहर निकलें।

हफ्ते भर चिपचिपी गर्मी से पीछा नहीं छुटेगा
प्रयागराज में अगले सात दिनों तक उमस भरी गर्मी के साथ रुक-रुक कर बारिश और गरज-चमक का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे तापमान में आंशिक गिरावट दर्ज की जाएगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस पूरे हफ्ते आसमान में बादलों का डेरा रहेगा और शहरवासियों को चिपचिपी गर्मी से जूझना पड़ सकता है।
कब होगी बारिश?
मौसम विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 6 से 11 जुलाई तक का संभावित पूर्वानुमान इस प्रकार है। 6 जुलाई (सोमवार) 38°C -27°C आंशिक रूप से बादल, एक या दो दौर की बारिश या गरज-चमक। 7 जुलाई (मंगलवार) 36 – 26 डिग्री सेल्सियस। बादल छाए रहेंगे। गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना। 8 जुलाई (बुधवार) 36-26 डिग्री सेल्सियस, तापमान में गिरावट, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश। 9 जुलाई (गुरुवार) 35- 25 डिग्री सेल्सियस। आमतौर पर बादल, ठंडी हवाओं के साथ बारिश के आसार। 10 जुलाई (शुक्रवार) 35-25 घने बादल छाएंगे, झमाझम बारिश से उमस से राहत मिलेगी। 11 जुलाई (शनिवार) 36- 26 डिग्री सेल्सियस। बादलों की आवाजाही रहेगी और रुक-रुक कर बौछारें पड़ेंगी।
पुरवैया हवाओं से बढ़ेगी आर्द्रता
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, खाड़ी की तरफ से आ रही नम हवाओं के चलते वायुमंडल में आर्द्रता (ह्यूमिडिटी) का स्तर 65 से 90 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके कारण भले ही पारा गिरकर 35 डिग्री सेल्सियस तक आ जाए, लेकिन शरीर को झुलसाने वाली ‘रियल फील’ गर्मी का अहसास 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर का ही होगा। दोपहर के समय उमस का ग्राफ सबसे ऊंचे स्तर पर रहेगा।
वज्रपात की चेतावनी
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस सप्ताह बारिश के साथ-साथ कई इलाकों में तीव्र बिजली चमकने और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की आशंका है। किसानों और राहगीरों को सलाह दी गई है कि वे मौसम खराब होने पर बड़े पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।
जलभराव वाले स्थान
भारी मानसूनी बारिश के दौरान सिविल लाइंस, झूंसी और नैनी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में जलभराव (वॉटरलॉगिंग) एक बड़ी समस्या बन जाती है। नगर निगम द्वारा की जाने वाली तैयारियों के बावजूद, कुछ जगह ऐसे हैं जहां कुछ ही घंटों की बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं।
सिविल लाइंस में कई हिस्से ड्रेनेज सिस्टम ब्लॉक होने के कारण जलमग्न हो जाते हैं। हिंदू हॉस्टल चौराहा हल्की बारिश में घुटनों तक पानी भर जाता है, जिससे हनुमान मंदिर और सुभाष चौराहे की तरफ जाने वाला ट्रैफिक ठहर जाता है। पत्रिका मार्ग और एल्गिन रोड यह दोनों वीआईपी रिहायशी मार्ग भारी बारिश में पूरी तरह पानी में डूब जाते है। थॉर्नहिल रोड पर जल निकासी धीमी होने से सड़कों पर लंबा जाम लग जाता है। गंगानगर के झूंसी में सालों पुरानी जल निकासी की समस्या बारिश में गहरा जाती है। गंगापार का यह क्षेत्र नाले और नालियों के सही नेटवर्क न होने के कारण बारिश के दिनों में टापू जैसी स्थिति में तब्दील हो जाता है। आवास विकास कॉलोनी (योजना-2) झूंसी का यह सबसे बड़ा हॉटस्पॉट है, जहां बारिश का पानी न केवल सड़कों पर जमा होता है बल्कि लोगों के घरों के भीतर तक घुस जाता है। हवेलिया और कोहना क्षेत्र यहां की अंदरूनी सड़कें कई दिनों तक जलमग्न रहती हैं, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। न्याय नगर और मायापुरी उचित ढलान सही नहीं बने होने से भारी जलभराव देखने को मिलता है। यमुनापार के नैनी और औद्योगिक क्षेत्र में रिहायशी और व्यवसायिक इलाकों में एक घंटे की बारिश में ताल-तलैया का दृश्य देखने को मिल जाता है। यमुनानगर में भारी वाहनों के आवागमन के कारण यह भाग मानसून में काफी प्रभावित रहता है।मिर्जापुर रोड व रीवारोड मुख्य मार्ग पर ड्रेनेज जाम होने के चलते सीवेज और बारिश का पानी मिक्स होकर सड़कों पर बहने लगता है। न्यू सब्जी मंडी, अरैल संगम रोड, छिवकी स्टेशन रोड, लेबर कालोनी, डांडी, गौहनिया, जसरा नवीन सब्जी मंडी, जसरा रेलवे क्रासिंग, रामपुर तिराहा और नैनी के अन्य व्यस्त चौराहों पर बारिश के बाद घुटनों तक पानी जमा होने की समस्या बनी रहती है। जिससे दोपहिया वाहनों का निकलना बंद हो जाता है।
नगर निगम क्षेत्रीय कार्यालय भी पानी में डूबा रहता है
विडंबना यह है कि जलभराव की समस्या दूर करने वाले नगर निगम के नैनी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय परिसर बारिश के पानी में डूब जाता है।
शहर के अन्य प्रमुख वॉटर लॉगिंग हॉटस्पॉट
बारिश के दौरान यदि आप शहर के मुख्य हिस्से की ओर यात्रा कर रहे हैं, तो अल्लापुर (बाघंबरी रोड), अलोपीबाग, जॉर्ज टाउन, टैगोर टाउन, एसआरएन अस्पताल रोड और रामबाग रेलवे स्टेशन के पास जाने से बचें। इन क्षेत्रों में भी जलभराव की गंभीर स्थिति बनी रहती है।

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