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मनपा में करोड़ों का ‘सुरक्षा’ घोटाला!

-फर्जी हाजिरी दिखाकर करोड़ों रुपए की निकासी का आरोप

-एसआईटी जांच और ईओडब्ल्यू से कार्रवाई की मांग

सामना संवाददाता / मुंबई

देश की सबसे अमीर मुंबई मनपा एक बार फिर कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के घेरे में है। शिक्षा विभाग और सुरक्षा विभाग के लिए जारी किए गए ‘प्रोवाइडिंग अटेंडेंट एंड मैनपावर सर्विसेज’ टेंडर में करीब १२० करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले का आरोप लगाया गया है। शिकायत में दावा किया गया है कि अधिकारियों और ठेकेदार कंपनियों की कथित मिलीभगत से टेंडर की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन कर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
शिकायत के अनुसार, मनपा ने तीन अलग-अलग कंपनियों को लगभग ४०० करोड़ रुपये के ठेके दिए। आरोप है कि इन ठेकों में नियमों को दरकिनार कर फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई, अपात्र कर्मचारियों की नियुक्ति की गई और दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं कर भारी भुगतान किया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि टेंडर की शर्तों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की नियुक्ति पर स्पष्ट रोक होने के बावजूद ऐसे लोगों को सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां सौंपी गर्इं।
ठेकेदार कंपनियों के संबंध सत्ताधारी नेताओं से
पुलिस सत्यापन प्रमाणपत्र अनिवार्य होने के बावजूद कथित तौर पर इसकी भी अनदेखी की गई। यह आरोप वरिष्ठ समाजसेवी विद्यानंद खरात ने लगाया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जिन तीन बड़ी कंपनियों को ठेके दिए गए हैं, उनका संबंध कथित तौर पर सत्तारूढ़ दलों के शीर्ष नेताओं से होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मामले में शीघ्र और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे मुंबई हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे। विद्यानंद खरात ने आरोप लगाया कि मनपा में सुरक्षा रक्षकों के लिए अनिवार्य जीपीएस आधारित टाइम-कीपिंग मशीन और कंप्यूटरीकृत ड्यूटी रोस्टर प्रणाली लागू करने के बजाय हस्तलिखित उपस्थिति रजिस्टरों के आधार पर कर्मचारियों की हाजिरी दर्ज कर करोड़ों रुपये के बिल पारित किए गए। उनका दावा है कि जिन लोगों के नाम पर भुगतान किया गया, उनमें से कुछ कथित रूप से ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं थे, जबकि कुछ जेल में थे या दुबई में रह रहे थे। इसके बावजूद उनके नाम पर वेतन जारी किया गया।
उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित कंपनियों के सभी भुगतान तत्काल रोके जाएं तथा पिछले २० महीनों में हुए कथित वित्तीय नुकसान की भरपाई संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों से की जाए।

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