-‘आपदा’ का शिकार हुआ मनपा का आपदा प्रबंधन विभाग…मीरा-भायंदर के कई इलाकों में जलभराव
सुरेश गोलानी / मुंबई
मूसलाधार बारिश ने मीरा-भायंदर मनपा द्वारा किए गए १०० प्रतिशत नाला सफाई के दावों की फिर एक बार पोल खोलकर रख दी है। सफाई व्यवस्था में ठेकेदार और मनपा प्रशासन द्वारा बरती गई लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण शहर के कई इलाकों में नागरिकों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदारों द्वारा जल निकासी के लिए लगाए गए अधिकतर पंपों के बंद होने से कई निचले इलाकों और सड़कों पर घुटनों तक पानी भरने से जनजीवन का बुरी तरह से प्रभावित होना यह साबित करता है कि मनपा का आपदा प्रबंधन विभाग अपने ढीले रवैये और लापरवाह कार्यशैली के कारण खुद ही आपदा का शिकार बन चुका है। मनपा प्रशासन के दावों के अनुसार, शहर के सभी बड़े और छोटे नालों की सफाई १०० प्रतिशत पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर के कई बड़े नाले आज भी कूडे-कचरे, गाद (सिल्ट), मलबे और जल निकासी में बाधा डालने वाले अवरोधों से भरे पड़े हैं। ४ करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के इन ठेकों के निविदा नियमानुसार, ठेकेदारों को मनुष्यबल के अलावा जेसीबी, बोट-पोक्लेन और हाइड्रोलिक अर्थ मूविंग मशीनों का उपयोग करके नालों की शत प्रतिशत सफाई करना अनिवार्य है। लेकिन लापरवाही और कमिशनखोरी के चलते कहीं सफाई का कार्य अधूरा है तो कहीं निकाली गई गाद को नालों के किनारे ही जमा कर दिया गया था जो बहकर फिर से नालों में चला गया।
पानी में उतरकर भाजपा नगरसेवकों का विरोध
नाला सफाई में कथित भ्रष्टाचार और लापरवाही के विरोध में भाजपा नगरसेवक सचिन डोंगरे, विशाल पाटील और करुणा ताई बारिश के पानी में बैठकर धरने पर उतर गए। ठेकेदार का भुगतान रोकने, ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई।
