सामना संवाददाता / नई दिल्ली
बांग्लादेश में चुनावों के बाद मोहम्मद यूनुस की जगह तारिक रहमान की सरकार बनी तो उम्मीद थी कि वहां भारत विरोधी कट्टरपन की भावना थोड़ी कम होगी। लेकिन, भारत के एक पूर्व जासूस ने पड़ोसी मुल्क की अंदरूनी हकीकत की जो खुफिया जानकारी जुटाई है, उससे लग रहा है भारत के खिलाफ बांग्लादेश के भीतर से कुछ बड़ा हो सकता है। भारत के पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने बांग्लादेश के बारे में जो खुफिया जानकारी सार्वजनिक की है, वह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत ही ज्यादा चिंताजनक है। इससे लग रहा है कि बांग्लादेश में भारत के खिलाफ जो असल खौफनाक साजिश चल रही है, वह ठीक से सामने आ ही नहीं रहा है।
बांग्लादेश के इरादे बहुत ज्यादा खतरनाक!
पूर्व रॉ एजेंट ने अपने एक एक्स पोस्ट में लिखा है, ‘सारी दुनिया की मीडिया एक ही चीज दिखा रही है कि तारिक रहमान चीन के करीब जा रहे। लेकिन, बांग्लादेश के भीतर जो आतंकी कैंप चल रहे हैं, उन पर किसी की नजर नहीं जा रही! जो दिख रहा है, असलियत उससे कहीं ज्यादा खतरनाक है।
लकी बिष्ट ने बांग्लादेश में सक्रिय कुल १३ टेरर कैंप और जेल से रिहा किए गए १७४ आतंकियों का जिक्र किया है, जिनका एक्टिव होना, भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बहुत ही ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने अपने पोस्ट में सिलसिलेवार बताए हैं कि ये टेरर कैंप कहां है, कितनी संख्या में हैं और वहां किन गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।
भारत के पूर्व जासूस ने बांग्लादेश में कुल पांच स्थानों का नाम बताया है, जहां ये १३ कैंप चल रहे हैं, उनमें पहला नाम है रंगपुर का है, जहां २ आतंकवादी कैंपों के सक्रिय होने का दावा किया गया है। यह भारत के लिए सामरिक तौर पर बहुत ही संवेदनशील चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर से सटा हुआ है। मोहम्मद यूनुस के समय से इस क्षेत्र पर बांग्लादेश की गंदी नजर है। दूसरा है चटगांव हिल, जहां तीन आतंकी वैंâप सक्रिय हैं। यहां मूल रूप से पाकिस्तानी खुफिया संगठन आईएसआई से जुड़े आतंकी संगठनों- हूजी बांग्लादेश और लश्कर का डेरा है। ये दोनों आतंकी संगठन भारत-विरोधी आतंकी अभियानों के लिए कुख्यात रहे हैं। तीसरी जगह है सिलहट, जहां पर ४ आतंकी वैंâप हैं। इसकी गतिविधियां बहुत ही ज्यादा संदिग्ध और गोपनीय है। यहां पूर्वोत्तर भारत में कहर बरपाने की साजिश रची जा रही है और यहां अल-कायदा से जुड़े ‘अंसारुल्लाह बांग्ला टीम’ के आतंकवादी तैयार हो रहे हैं। चौथा नाम नेत्रोकोना का है, जहां २ टेरर कैंप एक्टिव हैं और ये भी सीधे आईएसआई के कंट्रोल में है और उसी से जुड़े जेएमबी और नव-जेएमबी के दहशतगर्दों को ट्रेंड किया जा रहा है। पांचवीं जगह टंगाइल है, जहां मौजूद २ टेरर कैंपों को सीधे जमात-ए-इस्लामी कंट्रोल कर रहा है। पाकिस्तान समर्थित यह कट्टरपंथी संगठन बांग्लादेश की आजादी से लेकर अभी तक भारत-विरोधी सोच के लिए कुख्यात है और शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट में सीधे तौर पर शामिल रहा है।
