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निर्विरोध के लिए अपनाया जा रहा है…साम, दाम, दंड, भेद!

-चुनाव आयोग ने साधी चुप्पी…रोहित पवार का हमला

सामना संवाददाता / मुंबई

भाजपा नेता कहते हैं कि भाजपा में भाई-भतीजावाद नहीं चलेगा, लेकिन स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा में भाई-भतीजावाद सबसे ऊपर है। एक ही परिवार से पांच-छह लोगों को उम्मीदवार बनाया जा रहा है और कहीं किसी की पत्नी, मां, बहू को इसी भाई-भतीजावाद के जरिए निर्विरोध चुना जा रहा है। राकांपा (शरदचंद्र पवार) विधायक रोहित पवार ने इसको लेकर जमकर चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला बोला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनावों में निर्विरोध के लिए साम, दाम, दंड, भेद का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है और चुनाव आयोग एक शब्द भी नहीं बोल रहा है। रोहित पवार ने कल शुक्रवार सुबह अपने एक्स एकाउंट से एक पोस्ट शेयर किया। जिसमें उन्होंने कहा है कि पावर के अनलिमिटेड सेंट्रलाजेशन के बजाय, लोकल बॉडीज को डीसेंट्रलाइज किया जाना चाहिए और आम आदमी को पैâसले लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन आज, मंत्री की पत्नी, मां, चाचा या बहू निर्विरोध चुने जा रहे हैं।
इस निर्विरोध के लिए साम, दाम, दंड, भेद का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। उम्मीद थी कि चुनाव बिना डर के निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होंगे, लेकिन सत्तारूढ़ दल साम, दाम, दंड, भेद का रास्ता अख्तियार करके सत्ता पर कब्जा कर रहा है। चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बना हुआ है। यानी एक शब्द भी नहीं बोल रहा है।

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