“अब क्या बताएं, टूटे हैं कितने कहाँ से हम,
खुद को समेटते हैं यहाँ से, वहाँ से हम।
क्या जाने किस जहाँ में मिलेगा हमें सुकून,
नाराज हैं जमीं से, खफा आसमां से हम।
अब तो सराब से ही बुझाने लगे हैं प्यास,
लेने लगे हैं काम यकीं के गुमां से हम।
मिलते नहीं हैं अपनी कहानी में हम कहीं,
गायब हुए जब से तेरी दास्तां से हम।
कुछ और कहते रह गए अपनी जुबां से हम,
लेकिन हमारी आंखों ने कुछ और कह दिया।
क्या जाने किस निशाने पर जाकर लगेंगे कब,
छोड़े तो जा चुके हैं किसी की कमान से हम।
हम बिक रहे थे मेले में खुशियों के नाम पर,
मायूस होकर लौटे हैं हर एक दुकान से हम।”
— राजेश रेड्डी
शब्द और आवाज के धनी राजेश रेड्डी अपनी गजलों से शनिवार शाम मीरा रोड स्थित विरंगुला केंद्र में श्रोताओं को उस समय भाव-विभोर कर रहे थे, जब तेज और लगातार हो रही बारिश के कारण शासन लोगों को घर से बाहर न निकलने की चेतावनी जारी कर रहा था तथा स्कूल-कॉलेज बंद रखने के सर्कुलर जारी किए जा रहे थे।
व्याख्यान, कहानी-पाठ, नाटक, कविता, पुस्तक समीक्षा, गायन, नृत्य और ‘प्रिय लेखक से मिलिए’ जैसे आयोजनों की श्रृंखला में एक नया अध्याय जोड़ते हुए स्वरसंगम फाउंडेशन ने ‘दुष्यंत कुमार सम्मान’ की स्थापना की घोषणा की। यह सम्मान प्रत्येक वर्ष साहित्यिक सेवाओं के लिए किसी एक गजलकार को प्रदान किया जाएगा। लेखकों, कवियों, पत्रकारों और साहित्य-प्रेमियों से खचाखच भरे सभागार में फाउंडेशन के सदस्यों ने पहला ‘दुष्यंत कुमार सम्मान’ राजेश रेड्डी को प्रदान किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के सचिव डॉ. हरिप्रसाद राय ने राजेश रेड्डी के जीवन और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला। इसके बाद फाउंडेशन के सदस्यों ने उन्हें शॉल, मानपत्र, स्मृति-चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान के साथ एक बंद लिफाफे में मानधन भी प्रदान किया गया, जिसकी राशि गोपनीय रखी गई।
सम्मान समारोह के बाद प्रसिद्ध उद्घोषक यूनूस खान और मुस्त हसन अज्म ने राजेश रेड्डी से विस्तृत संवाद किया। प्रश्नोत्तर के इस सत्र में उनकी संपूर्ण साहित्यिक यात्रा श्रोताओं के सामने खुलकर आई। केवल मंच पर बैठे दोनों संवादकर्ताओं ने ही नहीं, बल्कि सभागार में उपस्थित श्रोताओं ने भी उनके जीवन, साहित्य और रचनाकर्म से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे। राजेश रेड्डी ने लगभग एक घंटे तक पूरी तन्मयता और आत्मीयता के साथ सभी प्रश्नों के उत्तर दिए।
गीत से गजल की ओर उनका रुझान, संगीत की दुनिया में प्रवेश, बड़े गायकों द्वारा उनकी गजलों का गायन, मंचीय अनुभव, गजल की लोकप्रियता, सोशल मीडिया पर गजल का भविष्य, शेर की रचना-प्रक्रिया, हिंदी-उर्दू गजल का संबंध, नई पीढ़ी के साथ उस्तादी-शागिर्दी की परंपरा, शायरी की गंभीरता तथा हिंदी काव्य-मंच की वर्तमान स्थिति जैसे विषयों पर उन्होंने बेबाकी से अपने विचार रखे। ये प्रश्न जहां एक ओर श्रोताओं की साहित्यिक समझ का परिचय दे रहे थे, वहीं उनके उत्तर राजेश रेड्डी की गहरी साहित्यिक दृष्टि और अनुभव का परिचायक थे।
प्रश्नोत्तर सत्र के बाद लगभग एक घंटे तक उन्होंने अपनी गजलों का पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को कभी खुशी तो कभी गम के भावों में डुबोए रखा। गजल-पाठ समाप्त होते ही पूरा सभागार खड़ा हो गया। हाथ जोड़कर और लगातार तालियां बजाकर श्रोताओं ने जिस आत्मीयता से उनका अभिनंदन किया, वह एक समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का अनुपम दृश्य था। सम्मान के औपचारिक प्रतीकों से कहीं बढ़कर यह राजेश रेड्डी का सच्चा नागरिक अभिनंदन था। कार्यक्रम के अंत में खराब गले के कारण औपचारिक वक्तव्य न दे पाने वाले हृदयेश मयंक ने सभी उपस्थित जनों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर दीनदयाल मुरारका, प्रणव प्रियदर्शी, ममता सिंह, ललिता अस्थाना, धीरेन्द्र अस्थाना, अजय रोहिल्ला, भगवान कौशिक, सुधीर मजुमदार, आर. एस. विकल, धर्मेंद्र प्रकाश चतुर्वेदी, श्रीप्रकाश तिवारी, नरोत्तम शर्मा, राकेश शर्मा, शैलेश सिंह, हरिमृदुल, डॉ. मुख्तार खान, संजय भिसे, राजेश रोहित, भूपेंद्र मिश्र, पुलक चक्रवर्ती, दिनेश गुप्त, प्रो. श्याम दिवाकर, डॉ. प्रदीप कुमार राय, धर्मराज राय और राम किरण सहित अनेक वरिष्ठ साहित्यकार एवं लेखक उपस्थित रहे।
