मुख्यपृष्ठस्तंभविशेष : अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कच्चा चिट्ठा... फाउंडर जावेद सिद्दीकी भी जांच...

विशेष : अल-फलाह यूनिवर्सिटी का कच्चा चिट्ठा… फाउंडर जावेद सिद्दीकी भी जांच एजेंसी के रडार पर… अरब देशों से होती रही फंडिंग

जय सिंह

अल-फलाह एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ होता है सफलता, उन्नति या ईश्वरीय कृपा से मिली भलाई या पूर्ण मुक्ति / सलामती। यह नाम यानी अल फलाह यूनिवर्सिटी बहुत सोच समझ कर रखा गया है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चेयरमैन हैं जावेद अहमद सिद्दकी। अल-फलाह यूनिवर्सिटी भले ही फरीदाबाद (हरियाणा) में स्थित है, लेकिन उसके संस्थापक और चेयरमैन के जन्म का मूल स्थान मध्य प्रदेश, महू में है। जावेद अहमद ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और बाद में शिक्षा, सॉफ्टवेयर, वित्तीय सेवाओं और ऊर्जा के क्षेत्रों में विस्तारित व्यवसाय चला रहे हैं। कई सालों से अल फलाह युनिवर्सिटी चल रही है।
जावेद की कई कंपनियां हैं और वे अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से अल फलाह यूनिवर्सिटी का संचालन करते हैं। पिछले १२ सालों में यूनिवर्सिटी ने तेजी से विस्तार किया। एक रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उसका वैंâपस क्षेत्रफल ३० एकड़ से बढ़कर लगभग ७० एकड़ हुआ है। विस्तार में विदेशी फंडिंग (विशेष रूप से अरब देशों से) का भी बड़ा योगदान रहा। यह फंडिंग विश्वविद्यालय के विकास, जमीन की खरीद और संचालन में उपयोग की गई मानी जा रही है। विवाद और जांच की शुरुआत। १० नवंबर २०२५ को दिल्ली के लाल किले के पास एक कार में धमाका हुआ था, जिससे जांच एजेंसियों की निगाह अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद की ओर घूमी। १३ नवंबर २०२५ एनएएसी का शो-कॉज नोटिस मूल्यांकन परिषद ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को जारी किया कि उसने अपनी वेबसाइट पर झूठी मान्यता का दावा किया है।
१५ नवंबर २०२५ को जांच में संदिग्ध चैट के आधार पर तीन डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया। एक डॉक्टर हाल ही में यूनिवर्सिटी से मेडिकल इंटर्नशिप पूरी कर चुका था।
ईडी की छापेमारी
ईडी ने लगभग २५ ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें दिल्ली और फरीदाबाद में, अल-फलाह यूनिवर्सिटी का वैंâपस, ट्रस्टियों के कार्यालय और अन्य संबंधित परिसरों को शामिल थे।
१८ नवंबर २०२५ को ईडी ने जावेद अहमद सिद्दकी (अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन / फाउंडर) को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया। छापेमारी में ईडी ने लगभग ४८ लाख नकद, डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए।
१९ नवंबर २०२५ को जावेद सिद्दकी को अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें १३ दिनों की ईडी हिरासत (पीएमएलए रिमांड) दी ताकि गहन पूछताछ और वित्तीय जांच हो सके। विशेष सुनवाई लगभग १ बजे रात में हुई। अदालत ने कहा कि जांच ‘अभी शुरुआती चरण में है’ और सिद्दीकी के खिलाफ वित्तीय अपराध (मनी लॉन्ड्रिंग, फंड डायवर्जन) के ‘गंभीर सबूत’ हैं।
१९ नवंबर २०२५ को ईडी ने बताया है कि उसकी पूछताछ का लॉजिकल प्रâेम सिर्फ मनी-लॉन्ड्रिंग तक सीमित नहीं है। वह यह भी देख रही है कि कुछ फंड आतंकवादी गतिविधियों (रेड फोर्ट ब्लास्ट से जुड़े आरोपों) में तो नहीं इस्तेमाल हुए। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने जावेद की उन शेल कंपनियों की पहचान की है जो उनके नियंत्रण में हैं और जिनके जरिए फंड ट्रस्ट से बाहर स्थानांतरित किए गए हो सकते हैं। इसके अलावा, उनकी २००३ की पाकिस्तान यात्रा भी एजेंसी की जांच के दायरे में है।
ईडी और अन्य एजेंसियां अब मौजूदा दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन, ट्रस्ट संरचना और विश्वविद्यालय से जुड़े अन्य व्यक्तियों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं, ताकि ‘४१५ करोड़ रुपए’ जैसी कथित धनराशि का स्रोत और उसका उपयोग ट्रेस किया जा सके। इसी बीच, एनएएसी की नोटिस और डॉक्टरों की जांच ने यूनिवर्सिटी पर आरोपों का दायरा बढ़ा दिया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी और उसके कुछ स्टाफ सदस्य इस सिलसिले में संदिग्ध हैं। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विशेष रूप से यूनिवर्सिटी की फंडिंग, ट्रस्ट और उन संस्थाओं के दस्तावेजों के बारे में पूछताछ के लिए जो जावेद सिद्दकी को पहले समन भेजा, यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के अंतर्गत आती हैं।
ईडी का दावा है कि यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के खाते में हो रही हेराफेरी में ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ के पैटर्न मिले हैं। ये पैसा ट्रस्ट से जुड़े अन्य संस्थानों (जावेद सिद्दकी के परिवार या उनसे जुड़े व्यवसायों) में ट्रांसफर किया गया था।
ईडी का यह भी कहना है कि लगभग ४१५ करोड़ की राशि यूनिवर्सिटी में आई है, जिसे गैरकानूनी तौर पर और मनी-लॉन्ड्रिंग के जरिए लाया गया हो सकता है। जांच में ईडी ने शेल कंपनियों की पहचान की है, जो अल-फलाह ट्रस्ट और सिद्दकी से जुड़ी हैं और इन कंपनियों के माध्यम से फंडिंग और ट्रांसफर किए गए पैसों पर संदेह है। ये फंडिंग मॉडल मनी लॉन्ड्रिंग की क्लासिक रणनीतियों से मेल खाता है।

अन्य समाचार