मोदी सरकार के शिक्षा बजट में न स्कॉलरशिप, न सीटें, सिर्फ भाषण
फिर ठगे गए नीट-जेईई के लाखों छात्र
शिक्षा बजट छात्रों के लिए बनी सबसे बड़ी निराशा
धीरेंद्र उपाध्याय
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने छात्रों की उम्मीदों पर बजट बुलडोजर चला दिया है। १.३९ लाख करोड़ रुपए के जिस शिक्षा बजट को ऐतिहासिक उपलब्धि बताकर पेश किया जा रहा है, वह हकीकत में एक बड़ा जुमला साबित हुआ है। पढ़ाई जहां लगातार महंगी होती जा रही है, वहीं बजट में छात्रों के सपने सस्ते कर दिए गए हैं। मोदी सरकार के इस शिक्षा बजट में न तो कोई नई स्कॉलरशिप है, न ही एमबीबीएस या आईआईटी जैसी प्रतिस्पर्धी पढ़ाइयों में सीटें बढ़ाने का साहसिक पैâसला। भारी-भरकम आंकड़ों और लंबे भाषणों के बीच जमीनी सच्चाई यह है कि नीट और जेईई की तैयारी में जुटे लाखों छात्र एक बार फिर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। शिक्षा बजट २०२६-२७ छात्रों के भविष्य को संवारने के बजाय, उनके लिए अब तक की सबसे बड़ी निराशा बनकर सामने आया है।
देश की शिक्षा व्यवस्था को संवारने के बड़े-बड़े दावों के बीच निर्मला सीतारमण ने रविवार को अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। बजट में शिक्षा के लिए अब तक की सबसे बड़ी राशि १.३९ लाख करोड़ रुपए का एलान किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह बजट छात्रों के लिए राहत से ज्यादा निराशा का दस्तावेज बनकर सामने आया है। केंद्रीय बजट २०२६-२७ में स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग को ८३,५६२.२२ करोड़ रुपए और उच्चतर शिक्षा विभाग को ५५,७२७.२२ करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
नई घोषणाएं, पुरानी परेशानियां
बजट में नए कॉलेज, कंटेंट क्रिएटर लैब्स, स्किलिंग प्रोग्राम्स और हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल की घोषणाएं जरूर की गई हैं। १५,००० उच्च माध्यमिक विद्यालयों और ५०० कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट निर्माण लैब, औद्योगिक कॉरिडोर के आस-पास पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप और पर्यटन स्थलों पर १०,००० टूरिस्ट गाइड्स के प्रशिक्षण जैसे एलान सूची में शामिल हैं, लेकिन इन तमाम घोषणाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल अनुत्तरित रह गया, क्या इससे नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं की भीषण प्रतिस्पर्धा झेल रहे छात्रों को कोई राहत मिलेगी।
न स्कॉलरशिप, न सीटें
इस बजट से मिडिल क्लास और गरीब पृष्ठभूमि के छात्रों को किसी नई छात्रवृत्ति योजना की उम्मीद थी। लेकिन सरकार ने इस मोर्चे पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। पोस्ट-मैट्रिक और प्री-मैट्रिक जैसी पुरानी योजनाएं जारी रखने की बात तो कही गई, लेकिन न तो स्कॉलरशिप की राशि बढ़ाई गई और न ही कोई नया फंड घोषित किया गया। इतना ही नहीं, एमबीबीएस और आईआईटी की सीटों में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि पिछले बजट में सरकार ने पांच वर्षों में ७५,००० नई मेडिकल सीटें जोड़ने का वादा किया था। विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि इस दिशा में कोई ठोस कदम उठेगा। लेकिन बजट २०२६-२७ में इस पर एक शब्द भी नहीं बोला गया।
