मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
यूपी एटीएस ने आतंकी संगठन आइसिस के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़ा आतंकी हारिश अली मुरादाबाद से गिरफ्तार किया है। सहारनपुर का रहने वाला हारिश अली सहारनपुर का रहने वाला है। बीडीएस द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। हारिश आइसिस मॉड्यूल के हैंडलर्स और मुजाहिद साथियों के साथ था जुड़ा है।
यह भारत सरकार को नुकसान पहुंचा शरिया कानून लाने के मकसद में जुटा था। अपने खतरनाक इरादों को पूरा करने के लिये इसने इंस्टाग्राम, इंक्रिप्टेड एप्स “सेशन”, ” डिस्कार्ड” पर फर्जी नाम से अकाउंट बनाये हुए थे। वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए हारिश अली ने कई ग्रुप्स बना रखे थे। इन ग्रुपों में वह आइसिस की जिहादी विचारधारा को फैला रहा था आरोपी।इन ग्रुपों में आइसिस की मीडिया चैनलों, पत्रिकाओं, आतंकी विचारधारा, मारे गए आतंकियों के चित्र, वीडियो, ऑडियो शेयर कर रहा था।
रमजान के महीने में लगातार घूम-घूम कर जेहादी विचारधारा के लोगों को आइसिस में भर्ती करा रहा था आरोपी। सीधे-साधे युवाओं को संपर्क बना कर रमजान के महीने में दिन का हवाला देकर गुमराह करता है। जिन लोगों को ठीक से अपने जाल में फंसा लेता है उन्हें विदेशी हैंडलरों से जोड़ देता है। कुख्यात आतंकियों के भाषणों का प्रचार प्रसार करता था। हारिश अली भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों के आईएसआईएस हैंडलर्स से जुड़ा था। आइसिस के मंसूबों को लेकर अपना एक अलग ग्रुप “अल इत्तेहाद मीडिया फाउंडेशन” भी हारिश ने बनाया था।
आइसिस के मीडिया न्यूज़ चैनल “अल – नाबा” और उसकी प्रोपेगेंडा मैगजीन” दबिक” को फॉलो करता था। पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों को उसने बताया है कि वह लोकतंत्र को नहीं मानता। वह और उसके विदेशी आका भारत मे शरिया कानून लागू कर खिलाफत व्यवस्था लागू करना चाहते हैं। जंग ए जिहाद के जरिए आइसिस का राज्य स्थापित करने का मंसूबा था। रमजान में धार्मिक तकरीर करने के लिये दो दर्जन लोग मुस्लिम समाज के युवाओं को आतंकवाद की राह पर धकेलने के लिये ब्रेनवॉश कर रहे हैं। जिसके चलते उससे जुड़े कई खतरनाक लोगों की सक्रियता बढ़ी है। हारिश अली ने अपने ग्रुप में लोगों को फिदायीन हमले के लिए भड़काने की जिम्मेदारी ली थी।
