मुख्यपृष्ठस्तंभउत्तर की बात : मंच पर साथ, पोस्ट से साफ!

उत्तर की बात : मंच पर साथ, पोस्ट से साफ!

रोहित माहेश्वरी
लखनऊ

गंगा एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी बुनियादी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया। लेकिन इस उपलब्धि के बीच जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में है, वह विकास नहीं बल्कि ‘उल्लेख की राजनीति’ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोशल मीडिया पोस्ट में कई नेताओं का नाम दर्ज हुआ, मगर राज्य के दोनों डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक का नाम गायब रहा, जबकि वे मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मौजूद थे। यह चूक मात्र तकनीकी भूल है या इसके पीछे कोई राजनीतिक संकेत छिपा है। यही सवाल अब उठ रहा है। राजनीति में प्रतीक और संदेश अक्सर शब्दों से ज्यादा बोलते हैं। किसी बड़े आयोजन में नाम का शामिल होना सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि शक्ति-संतुलन का संकेत भी माना जाता है। चिंता की बात यह है कि यह पहली बार नहीं हुआ। अयोध्या दीपोत्सव के विज्ञापन में भी इसी तरह दोनों डिप्टी मुख्यमंत्री का नाम गायब रहा था। बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं संयोग कम और संकेत ज्यादा लगने लगती हैं।
जो कल थे विरोधी, आज वही साझेदार
उत्तर प्रदेश की राजनीति में रिश्ते जितनी तेजी से बनते हैं, उतनी ही तेजी से उनके पुराने अध्याय भी सामने आ जाते हैं। वैâबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ मऊ की अदालत द्वारा जारी गैरजमानती वारंट इसी विरोधाभास की ताजा मिसाल है। यह मामला २०१९ लोकसभा चुनाव का है, जब राजभर भाजपा के मुखर आलोचक थे और रतनपुरा की सभा में कथित तौर पर भाजपा नेताओं को लेकर अभद्र टिप्पणी और जूता मारने की धमकी दी थी। विडंबना यह है कि आज वही राजभर भाजपा के साथ सत्ता में साझेदार हैं। जिस बयान को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुकदमा दर्ज कराया था, उसी मामले में अब उनके सहयोगी नेता को अदालत में जवाब देना पड़ रहा है। यह केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक स्मृति और अवसरवाद के टकराव का प्रतीक भी है।
भाजपा राज में न्याय पर सवाल
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की खागा तहसील में दर्ज सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। युवती की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज हुई, दो आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन मुख्य आरोपी बबलू सिंह उर्फ बबलू ठाकुर, जिसे स्थानीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा पदाधिकारी बताया जा रहा है, अब तक फरार है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं, बल्कि पहले भी यहां कई युवतियों के साथ ऐसी वारदातें हो चुकी थीं, जो सामने नहीं आ पाईं। अगर यह सच है, तो यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि लंबे समय से चल रहे आपराधिक नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिस पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।

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