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इथेनॉल को पेट्रोल की जगह देने की तैयारी!

धीरज फूलमती सिंह
मुंबई

भारत में सरकार लगातार पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। इसी क्रम में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने पहले ही देशभर में E२० पेट्रोल लागू कर दिया है, जिसमें २० प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सेंट्रल मोटर वेहिकल्स रूल्स, १९८९ में बदलाव का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन २७ अप्रैल को जारी किया है। इसका मकसद ज्यादा इथेनॉल मिश्रित ईंधन को कानूनी रूप से शामिल करना और उसे बढ़ावा देना है।
प्रस्ताव के अनुसार, अब E८५ फ्यूल यानी ८५ प्रतिशत इथेनॉल और पेट्रोल का मिश्रण और १०० प्रतिशत इथेनॉल यानी E१०० को भी नियमों में शामिल किया जाएगा। इससे भविष्य में वाहन लगभग शुद्ध इथेनॉल पर चल सकेंगे। इसके साथ ही बायोडीजल के लिए भी नया प्रावधान किया गया है, जिसमें ँ१० को बदलकर ँ१०० यानी १०० प्रतिशत बायोडीजल किया जाएगा।
इसके अलावा, ईंधन की तकनीकी परिभाषाओं में भी बदलाव किया जा रहा है। जैसे हाइड्रोजन वाहनों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द Hydrogen +CN को बदलकर Hydrogen+CNG किया जाएगा। वहीं पेट्रोल वाहनों के लिए फ्यूल वैâटेगरी को अपडेट किया जाएगा ताकि उसमें E१० और E२० जैसे मिश्रण स्पष्ट रूप से शामिल हों। सरकार ने यह ड्राफ्ट आम लोगों और विशेषज्ञों की राय के लिए सार्वजनिक कर दिया है। सुझाव मिलने के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।
भारत ने वर्ष २०२५ में पेट्रोल में २० प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E२०) का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है ताकि महंगे तेल आयात पर निर्भरता कम हो सके।
इथेनॉल एक जैव ईंधन है, जो शुगर के फर्मेंटेशन से तैयार किया जाता है। भारत में इसे पेट्रोल के साथ मिलाने के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम चलाया जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा कि भारत को भविष्य में १०० प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग की दिशा में बढ़ना चाहिए, ताकि देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके और प्रदूषण कम किया जा सके। सरकार का मानना है कि यह कदम न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर होगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।

आमरस का कड़वा सच
अभी हाल ही में केमिकल से पकाए तरबूज खा कर मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की मृत्यु हो गई। आज आलम यह है कि मंडियों में तरबूज खरीदने को कोई तैयार नही है, जो खरीद रहे हैं, वो दुकानदार को पहले चखा कर देख रहे हैं, चारों तरफ डर का माहोल है। मनुष्य के लालच ने और खाद्य पदार्थों में मिलावट ने कई ने लोगों की जान ले ली है तो कई जीवन भर के लिए बिस्तर पकड़ लिया है।
आज कल गर्मी बढ़ गई है, इसलिए मुंबई की सडकों पर नीबू पानी और आमरस की खपत बढ गई है। लोग सड़क किनारे फुटपाथ पर १५-२० रूपए में मिलने वाले आमरस को खूब चाव से पीते हैं। आप को सावधान कर दें कि आप १५-२० रूपए में आम का स्वाद नहीं, अपनी अर्थी का सामान खरीद रहे हैं!
​गजब का गणित है भाई! जिस शहर में एक ढंग का आम `१०० किलो के नीचे बात नहीं करता, वहां ये १५ रूपए वाले ‘समाजसेवी’ आपको गिलास भर-भर के मैंगो शेक पिला रहे हैं। ये कोई कुदरत का करिश्मा नहीं, बल्कि आपकी सेहत के साथ खेला जा रहा एक बहुत बड़ा और गंदा खेल है। जरा सोचिए, जिस शेक को घर में शुद्ध दूध और असली आम से बनाने में ४०-५० रूपए का खर्च आता है, वो रेहड़ी वाला मुनाफा कमाकर आपको १५-२० रूपए में वैâसे पिला पा रहा है? असल में उस पीले घोल में आम का ‘अ’ भी नहीं होता, बल्कि उसमें होता है वैंâसर पैदा करने वाला सिंथेटिक पीला रंग, सस्ती सैक्रीन और घटिया क्वालिटी का पाउडर वाला दूध जो आपके लीवर और किडनी की बैंड बजाने के लिए काफी है।
​सस्ता पीने की ये होड़ आपको धीरे-धीरे अस्पताल के बिस्तर की ओर धकेल रही है। आप जिसे पल भर की ठंडक समझकर गटक रहे हैं, वो दरअसल रसायनों का एक ऐसा कॉकटेल है जो आपके शरीर के अंगों को अंदर ही अंदर गला रहा है। १५-२० रूपए बचाकर खुद को बहुत तीस मार खां समझने की गलती मत कीजिए, क्योंकि आज बचाए गए ये चवन्नी-अठन्नी कल डॉक्टर की भारी-भरकम फीस और दवाइयों के बिल में ब्याज समेत वसूल हो जाएंगे। प्यास लगी है तो सादा पानी पी लीजिए या सामने नींबू पानी बनवा लीजिए, लेकिन इस नकली मैंगो शेक के नाम पर अपनी नसों में जहर मत उतारिए। याद रखिए, आपकी जान इतनी सस्ती नहीं है कि उसे सड़क किनारे बिकने वाले किसी भी पीले केमिकल के बदले दांव पर लगा दिया जाए। समय रहते जाग जाइए, वरना ये ‘सस्ता सौदा’ आपकी जिंदगी का सबसे महंगा सबक साबित होगा!

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