एटीएफ कीमतों के कारण एयरलाइन उद्योग गंभीर संकट में
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश में लगातार बढ़ती हवाई ईंधन (एटीएफ) की कीमतों ने विमानन उद्योग की कमर तोड़ दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि प्रमुख एयरलाइंस, एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट ने केंद्र सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो हवाई यात्राएं प्रभावित हो सकती हैं। बढ़ते खर्च और घटती मार्जिन के बीच एयरलाइंस के लिए संचालन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों को महंगी टिकट और कम उड़ानों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में आनेवाले समय में हिंदुस्थान में हवाई यात्राएं बंद होने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता।
बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। साथ ही कई देशों के एयरस्पेस प्रतिबंधों की वजह से लंबी दूरी की उड़ानों का खर्च भी काफी बढ़ गया है। एयरलाइंस ने एटीएफ की तर्कसंगत कीमत तय करने, घरेलू ऑपरेशन के लिए एटीएफ पर लगने वाले ११ प्रतिशत उत्पाद शुल्क को अस्थायी रूप से निलंबित करने और प्रमुख राज्यों में वैट दरों में कमी की मांग की है। एफआईए (फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस) ने कहा, `भारत का सबसे बड़ा एविएशन हब दिल्ली, २५ प्रतिशत वैट के साथ देश में दूसरा सबसे ऊंचा वैट वसूलता है। तमिलनाडु २९ प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है। मुंबई, बंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे अन्य प्रमुख एविएशन हब में वैट दरें १६ प्रतिशत से २० प्रतिशत के बीच हैं। ये छह शहर भारत के भीतर एयरलाइंस के ५० प्रतिशत से अधिक संचालन को कवर करते हैं। एयरलाइंस कंपनियों ने सरकार से एटीएफ कीमतों में कमी, टैक्स राहत और वित्तीय समर्थन जैसे कदम उठाने की अपील की है, ताकि उद्योग को संकट से बाहर निकाला जा सके।
