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डिजिटल अरेस्ट का आतंक … ठगी अब सिर्फ पैसे नहीं, जान भी ले रही है! …बिजनौर की मोनिका की मौत ने उजागर किया साइबर अपराध का सबसे क्रूर चेहरा

अनिल तिवारी
बिजनौर के गांव फरीदपुर भोगी में २८ वर्षीय मोनिका की मौत ने डिजिटल ठगी के उस भयावह रूप को सामने ला दिया है, जिसमें अपराधी सिर्फ बैंक खाते खाली नहीं करते, बल्कि पीड़ित के मन, परिवार और जीवन पर हमला करते हैं। खबरों के अनुसार, मोनिका को कई दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराया-धमकाया गया। उसे झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने, पुलिस कार्रवाई और परिवार को नुकसान पहुंचाने जैसी धमकियां दी गईं। मोनिका के सुसाइड नोट में अज्ञात युवक द्वारा डराने-धमकाने और ब्लैकमेल करने की बात सामने आई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि मोनिका की मौत के बाद भी साइबर ठगों ने पीछा नहीं छोड़ा। जब परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में था, तब भी उसके मोबाइल पर वीडियो कॉल आती रहीं। कॉल करने वाला व्यक्ति पुलिस की वर्दी में दिखा और खुद को क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर मोनिका से बात कराने की मांग करता रहा। यह तथ्य बताता है कि डिजिटल अरेस्ट गिरोह कितने निष्ठुर, संगठित और बेखौफ हो चुके हैं।
मानसिक हत्या!
डिजिटल अरेस्ट मानसिक उत्पीड़न का हथियार बन चुका है। अपराधी तकनीक का इस्तेमाल, कानून के डर को हथियार बनाकर कर रहे हैं। सरकार, पुलिस, सोशल मीडिया कंपनियों और बैंकों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे गिरोहों पर तेज, समन्वित और कठोर कार्रवाई करें। हर परिवार में यह बात साफ-साफ समझाई जानी चाहिए कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या अदालत वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती।

यहां शिकायत करें!
ऐसी कॉल आते ही फोन काट दें। तुरंत परिवार या विश्वसननीय व्यक्ति को बताएं। १९३० साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। यदि पैसा ट्रांसफर हो गया है तो जितनी जल्दी शिकायत होगी, खाते प्रâीज होने की संभावना उतनी बढ़ेगी।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’?
‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई वैध प्रक्रिया नहीं है। कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स, कस्टम या क्राइम ब्रांच अधिकारी किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं कर सकता। प्रâॉड अक्सर इन विभागों के अधिकारी बनकर कॉल कर बताते हैं कि उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग, अश्लील सामग्री, टेरर फंडिंग जैसे गंभीर अपराधों में हुआ है। फिर वे डिजिटल अरेस्ट की फेक प्रकिया अपनाते हैं।

मुंबई में दर्जनों घटनाएं
मुंबई में भी डिजिटल अरेस्ट के दर्जनों मामले सामने आए हैं। हाल ही में घाटकोपर के ८५ वर्षीय बुजुर्ग को दो सप्ताह तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर १.१ करोड़ रुपए ठगने का मामला दर्ज हुआ। ठगों ने पुलिस की वर्दी, नकली दस्तावेज और सरकारी मुहरों का इस्तेमाल किया। मार्च २०२५ में मुंबई की ८६ वर्षीय महिला से लगभग २०.२५ करोड़ रुपए ठगे गए थे।

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