मुख्यपृष्ठस्तंभस्कैम्स एंड स्कैंडल्स : कभी डिजाइनर तो कभी आर्ट कलेक्टर!

स्कैम्स एंड स्कैंडल्स : कभी डिजाइनर तो कभी आर्ट कलेक्टर!

(सत्ता में सुंदरी की घुसपैठ-१३)
श्रीकिशोर शाही
प्रâांसीसी पासपोर्ट और ‘पामेला बोर्डेस’ के नए रहस्यमयी उपनाम से पूरी तरह लैस होकर, पामेला ने ताकतवर शहर लंदन में अपने कदम रखे। अस्सी के दशक का लंदन महज एक शहर नहीं था, बल्कि दुनियाभर के अरबपतियों, पावर ब्रोकर्स और सत्ता के भूखे रसूखदारों का सबसे बड़ा और सुरक्षित खेल का मैदान था। पामेला अच्छी तरह जानती थी कि अगर दुनिया पर राज करना है तो लंदन के इसी अभेद्य किले को हर हाल में फतह करना होगा।
लंदन पहुंचते ही पामेला ने अपनी एक बेहद सटीक और शातिर बिसात बिछानी शुरू कर दी। उसने खुद को एक संघर्षरत मॉडल के बजाय एक बेहद अमीर और रहस्यमयी ‘विदेशी सोशलाइट’ के रूप में पेश किया। उसका निशाना लंदन के वे सबसे महंगे और एक्सक्लूसिव नाइट क्लब थे, जहां सिर्फ दुनिया के गिने-चुने रईसों को ही प्रवेश मिलता था। ट्रैम्प्स और एनाबेल्स जैसे एलीट क्लबों में पामेला की एंट्री किसी तूफान से कम नहीं थी। महंगी शराब, डिजाइनर कपड़े और बात करने के सम्मोहक अंदाज ने जल्द ही लंदन के सबसे रईस मर्दों को उसका पूरी तरह दीवाना बना दिया।
वह महज क्लबों में डांस करने नहीं जाती थी, वह वहां अपना नेटवर्क बनाने जाती थी। पामेला ने चतुराई से खुद को कभी इंटीरियर डिजाइनर तो कभी आर्ट कलेक्टर के रूप में पेश किया, ताकि वह उस एलीट क्लास का अहम हिस्सा लग सके। उसकी इस शानदार झूठी कहानी पर किसी ने जरा भी शक नहीं किया, क्योंकि उसका बेपनाह हुस्न और गजब का आत्मविश्वास हर किसी की आंखों पर पर्दा डाल देता था।
कुछ ही महीनों के भीतर, पामेला लंदन की हाई-सोसाइटी का एक ऐसा जाना-माना नाम बन गई, जिसके बिना कोई भी बड़ी पार्टी पूरी नहीं मानी जाती थी। शहर के बड़े-बड़े बिजनेसमैन, रईस बैंकर और शाही परिवारों से ताल्लुक रखने वाले लोग उसके इर्द-गिर्द मंडराने लगे थे। पामेला ने सफलतापूर्वक लंदन के रईसों की उस चकाचौंध भरी महफिल में अपनी एक मजबूत और सुरक्षित जगह बना ली थी। लेकिन उनके लिए यह सिर्फ एक शुरुआत थी; उसकी असली और सबसे खतरनाक मंजिल तो अभी भी उससे कुछ कदम दूर थी।
(शेष अगले अंक में)

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