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मेट्रो के बैरिकेड बने ट्रैफिक का ‘विलेन’, अब एमएमआरडीए ने की हटाने की तैयारी

जेदवी / मुंबई
मुंबईकर पिछले कई वर्षों से मेट्रो परियोजनाओं के नाम पर टूटी सड़कों, अंतहीन ट्रैफिक जाम और धूल-मिट्टी का नरक झेलते रहे, लेकिन अब मानसून सिर पर आते ही एमएमआरडीए को बैरिकेड हटाने की याद आई है। शहरभर में मेट्रो निर्माण के कारण घिरी सड़कों को लेकर जनता लगातार नाराजगी जताती रही, जिसके बाद अब प्रशासन बड़े पैमाने पर बैरिकेड हटाने का अभियान चला रहा है।
एमएमआरडीए ने दावा किया है कि विभिन्न मेट्रो मार्गों पर १.१४ लाख मीटर से अधिक बैरिकेड हटाए गए हैं, ताकि मानसून के दौरान ट्रैफिक और जलभराव की समस्या को कम किया जा सके। सवाल यह उठ रहा है कि अगर कई हिस्सों में वायाडक्ट और संरचनात्मक काम पहले ही पूरे हो चुके थे, तो सड़कें जनता के लिए समय रहते क्यों नहीं खोली गईं?
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों पर वर्षों तक बैरिकेड के कारण रोजाना घंटों ट्रैफिक जाम लगा रहा। संकरी सड़कों, धूल, गड्ढों और डायवर्जन ने आम नागरिकों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी। अब जब मानसून नजदीक है और जलभराव का खतरा मंडरा रहा है, तब प्रशासन युद्धस्तर पर कार्रवाई का दावा कर रहा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे नागरिवâ-केंद्रित पैâसला बताते हुए कहा कि बैरिकेड हटने से ट्रैफिक का बहाव सुधरेगा और लोगों को राहत मिलेगी। वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी सड़क की उपलब्ध जगह जल्द बहाल करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सवाल यही है कि मुंबईकरों को यह राहत पहले क्यों नहीं मिली? वर्षों तक मेट्रो निर्माण के नाम पर जनता को जाम, धूल और अव्यवस्था में झोंकने के बाद अब मानसून से ठीक पहले शुरू हुई यह कवायद प्रशासन की तैयारी पर ही सवाल खड़े कर रही है। एमएमआरडीए आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी ने २४ घंटे आपातकालीन तैयारी, डिवॉटरिंग पंप और सुरक्षा व्यवस्था तैनात करने का दावा किया है, लेकिन हर साल बारिश में डूबती मुंबई को देखते हुए नागरिकों में अब भी प्रशासनिक दावों को लेकर संशय बना हुआ है।

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