मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक भावुक विनती की है कि प्रधानमंत्री मोदी का मजाक न उड़ाया जाए। इस बहाने महाराष्ट्र को यह समझ आया कि फडणवीस विनती भी करते हैं। मोदी का उपहास कौन और क्यों कर रहा है, यह फडणवीस को स्पष्ट करना चाहिए। जनता सच बोल रही है, लेकिन अगर किसी को वह उपहास लगता है तो यह उसका अपना निजी मामला है। मोदी को अचानक पेट्रोल-डीजल आदि की किल्लत की चिंता सताने लगी। फिर उन्होंने लोगों का मार्गदर्शन किया, ‘यह मत करो, वह मत करो, लंबी यात्रा से बचो, विदेश न जाओ, घर बैठकर काम करो’ आदि। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को मोदी के निर्देश मान्य हैं इसलिए अब राज्य के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ‘घरकोंबड़ा’ (घर से न निकलनेवाला) की भूमिका में नजर आएंगे। यदि मंत्रालय के कर्मचारी घर से ही काम करेंगे तो मुख्यमंत्री का मंत्रालय में क्या काम? ये हालात उन पर वक्त द्वारा लिया गया प्रतिशोध है। कोविड काल में प्रधानमंत्री मोदी का यही आह्वान था ‘बाहर न निकलें, घर से काम करें।’ तब तो बीमारी के संक्रमण का डर था। स्पर्श होना भी बीमारी पैâलाने जैसा था और लोग तेजी से मर रहे थे। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे प्रधानमंत्री के निर्देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मार्गदर्शन के अनुसार घर बैठकर लोगों की जान बचाने का काम कर रहे थे। लेकिन तब फडणवीस और ‘मिंधे’ ने वैâसी-वैâसी टीका-टिप्पणी की थी? अब मोदी ने भी आपको ‘घरकोंबड़ा’ बनने का निर्देश दिया है। अब आप उन निर्देशों का पालन करेंगे या उन्हें तोड़ेंगे? अब ‘मिंधे’ कहते हैं कि मोदी ने राष्ट्रहित में यह मार्गदर्शन दिया है। तो क्या कोविड काल में घर बैठकर काम करना
जनहित और राष्ट्रहित
नहीं था? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गाड़ियां इस्तेमाल न करें। इसके बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं का घोड़े पर सवार होकर, बैलगाड़ी पर बैठकर या साइकिल से काम पर निकलना मोदी को हास्यास्पद साबित करनेवाला है। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी कल दिल्ली की सड़कों पर सिर्फ दो गाड़ियों के साथ घूमते दिखे, जिसका दृश्य उनकी अपनी समाचार एजेंसी ने प्रसारित किया। सवाल यह है कि यदि प्रधानमंत्री और उनकी सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ दो गाड़ियों में सिमट सकती है तो पिछले १२ वर्षों से वे ५० गाड़ियों का काफिला लेकर क्यों घूम रहे थे? ईंधन पर करोड़ों की बर्बादी क्यों की गई? अफवाह है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री शाह ने भी अपने काफिले की गाड़ियां कम कर दी हैं। मूल रूप से मोदी अक्सर विदेश यात्रा पर रहते हैं। अमेरिका और इजरायल के दो ‘नौटंकीबाज’ राष्ट्रप्रमुखों को छोड़ दिया जाए तो मोदी की तरह ५० गाड़ियों का काफिला लेकर कोई नहीं घूमता। उप मुख्यमंत्री ‘मिंधे’ और उनके चमचों तथा समर्थकों का काफिला तो मजाक का विषय है ही। आपको यह ठाठ-बाट किस जनसेवा के लिए चाहिए? यूरोप के कई देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति स्वयं गाड़ी चलाकर कार्यालय पहुंचते हैं। ‘जनता के पैसे की फिजूलखर्ची क्यों की जाए?’ यह प्रश्न उन्हें सताता है और यह उचित भी है। प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान के जवाब में फडणवीस ने महाराष्ट्र के मंत्रियों के विदेश दौरे रद्द कर दिए। चार्टर्ड विमान और हेलिकॉप्टर का उपयोग न करने की हिदायत दी और मंत्रियों को मेट्रो से यात्रा करने का सुझाव दिया। उससे बेहतर तो यह होता कि वे मंत्रियों से ‘पैसे खाना’ बंद करने को कहते। गुरुवार को मुख्यमंत्री फडणवीस अपना नियमित काफिला छोड़कर स्वयं बुलेट चलाकर विधान भवन पहुंचे। उनके सुरक्षा रक्षकों का दस्ता भी
दुपहिया वाहनों पर
उनके साथ पहुंचा। आज भले ही आप यह सब कर रहे हों, लेकिन कल तक खुद फडणवीस और दोनों उप मुख्यमंत्री अलग-अलग चार्टर्ड विमान लेकर असम और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में गए ही थे न? मोदी ने भी गुजरात में सौ गाड़ियों का रोड शो करके पश्चिम बंगाल की जीत का जश्न मनाया था। जब आप ऐसे कृत्य करते हैं तो वे उपहास का विषय बनेंगे ही। मोदी के कारण ही देश पर वर्तमान आर्थिक और ईंधन संकट टूट पड़ा है। ‘ईवीएम’ में कमलाबाई को ठूंसने से यह संकट दूर नहीं होगा। अमेरिका के दबाव के कारण मोदी रूस से सस्ता गैस लेने को तैयार नहीं हैं। मोदी की कायरता के कारण ही भारत ईंधन और गैस के संकट से गुजर रहा है। मोदी की स्वार्थी नीतियों की वजह से ही ‘ओएनजीसी’ जैसी तेल और गैस उत्पादक सरकारी कंपनियां कंगाल हो गई हैं। २०१४ में ओएनजीसी के पास १३ हजार करोड़ रुपये का विशाल ‘वैâश रिजर्व’ था, वो आज ८० हजार करोड़ के कर्ज में डूबी है। २०१४ तक भारत दुनिया के २७ प्रतिशत तेल का उत्पादन स्वयं करता था। मोदी ने १८-१८ घंटे मेहनत करके इस स्वदेशी तेल उत्पादन को १३ प्रतिशत पर ला खड़ा किया है, लेकिन भाजपा के खाते में आज भी दस हजार करोड़ रुपये जमा हैं और ‘पीएम केयर्स फंड’ में हजारों करोड़ पड़े हैं। भाजपा को यह सारा पैसा सरकारी खजाने में दान करके त्याग और राष्ट्र सेवा का उदाहरण पेश करना चाहिए। मोदी अब सात देशों की यात्रा पर निकल रहे हैं, जबकि लोगों को देशभक्ति के नाम पर घर बैठने की सलाह दे रहे हैं। देशसेवा के नाम पर घर बैठकर काम करने की सलाह देनेवाले इस सरकार को ‘घरकोंबडा भूषण’ पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए।
