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विवादों में घिरी तीसरी मुंबई परियोजना … पर्यावरण और जनहित की अनदेखी का आरोप

मनमोहन सिंह / नई मुंबई
एमएमआरडीए द्वारा पनवेल, उरण और पेन क्षेत्रों में प्रस्तावित तीसरी मुंबई विकास परियोजना विवादों के घेरे में आ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता रमाकांत पाटील ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से लिखित शिकायत कर परियोजना में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं और कानूनी उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, इस महात्वाकांक्षी परियोजना में भूमि अधिग्रहण अधिनियम २०१३ और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम १९८६ के अनिवार्य प्रावधानों को दरकिनार किया गया है।
पाटील का दावा है कि जन सुनवाई, सामाजिक प्रभाव आकलन और पर्यावरण मंजूरी जैसी पारदर्शी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना ही काम आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना के कारण क्षेत्र के मैंग्रोव वनों, खारे दलदलों और प्राकृतिक जल स्रोतों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्राकृतिक सुरक्षा कवचों के नष्ट होने से भविष्य में बाढ़ और सुनामी जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही, यहां की स्थानीय जैव विविधता भी पूरी तरह समाप्त हो सकती है। परियोजना से प्रभावित किसानों, मछुआरों, आदिवासियों और नमक मजदूरों के लिए स्पष्ट पुनर्वास नीति का अभाव है। वर्तमान में प्रस्तावित २२.५ प्रतिशत विकसित भूखंड के विकल्प को स्थानीय लोगों ने बाजार मूल्य की तुलना में नाकाफी बताया है।
शिकायतकर्ता ने प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक हितों के बीच सांठगांठ का संदेह जताया है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए स्पष्ट योजना न होने के कारण इसे कुप्रशासन की श्रेणी में रखा गया है। अब सभी की नजरें मुख्यमंत्री के निर्णय पर टिकी हैं कि क्या विकास की इस दौड़ में पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों की बलि दी जाएगी या इसमें सुधार किया जाएगा।

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