मुख्यपृष्ठनए समाचारटीएमयू में एक्सपर्ट्स बोले-सस्टेनेबल डवलपमेंट के लिए इंजीनियरिंग में मल्टीडिसिप्लिनरी एप्रोच अनिवार्य

टीएमयू में एक्सपर्ट्स बोले-सस्टेनेबल डवलपमेंट के लिए इंजीनियरिंग में मल्टीडिसिप्लिनरी एप्रोच अनिवार्य

सामना संवाददाता / मुरादाबाद

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से इन्नोवेशंस इन स्मार्ट एंड सस्टेनेबल इंजीनियरिंग पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस- आईसीआईएसएसई में कनाडा की प्रतिष्ठित एआई कंपनी थॉटवर्क्स में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर युवाक्ष ठुकराल ने एआईः द नेक्सट इलेक्ट्रिफिकेशन चैलेंज, जबकि बॉन यूनिवर्सिटी-जर्मनी में डायरेक्टर एंड एआई रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. कुलदीप सिंह ने एआई प्रोगेस ऑन बींग रेलेवेन्ट इन जॉब मार्केट पर ऑनलाइन व्याख्यान दिए। कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से करीब 62 रिसर्च पेपर्स प्रस्तुत किए गए। इससे पूर्व मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन और वंदना के संग शंखनाद हुआ। इस मौके पर गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के वीसी प्रो. सचिन माहेश्वरी, एमएनएनआईटी प्रयागराज के इलेक्ट्रिकल विभाग के प्रो. आशीष कुमार सिंह, स्मार्ट सिटी मुरादाबाद के चीफ इंजीनियर श्री अनिल कुमार मित्तल, महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड यूनिवर्सिटी, बरेली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. देश दीपक शर्मा के संग-संग टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन, डीन अकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, सीओई के डीन प्रो. आरके द्विवेदी, प्रो. अनुराग वर्मा आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही। सभी अतिथियों को तुलसी का पौधा और श्रीमदभागवत गीता भेंट किए गए। वीसी प्रो. वीके जैन ने उम्मीद जताई, इंजीनियरिंग स्टुडेंट्स के लिए यह कॉन्फ्रेंस मील का पत्थर साबित होगी। कॉन्फ्रेंस में सोवेनियर का विमोचन भी हुआ।

औद्योगिक कचरे को बिना प्रोसेसिंग नदियों में न डालेंः प्रो. सचिन माहेश्वरी
गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के वीसी प्रो. सचिन माहेश्वरी बतौर मुख्य अतिथि बोले, धरा को सेहतमंद रखने के लिए औद्योगिक कचरे की प्रोसेसिंग जरूरी है। इसे बिना प्रोसेसिंग करे नदियों में डाला तो भयंकर दुष्परिणाम होंगे। सस्टेनेबल डवलपमेंट के लिए इंजीनियरिंग में मल्टीडिसिप्लिनरी एप्रोच को अपनाना ही होगा। प्रो. माहेश्वरी बोले, औद्योगिक विस्तार और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बढ़ती डिमांड देश के लिए दोहरी चुनौती है। एआई क्रांति के कारण अधिक विद्युत उत्पादन और इंफ्रॉस्ट्रक्चर बेहद जरूरी है। इन चुनौतियों से बचाव के लिए नवीनीकरणीय ऊर्जा जैसे- सौर और पवन ऊर्जा बेसलोड आपूर्ति प्रदान करने का सबसे मजबूत विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

सस्टेनेबिलिटी बढ़ाने को पाठ्यक्रमों में करना होगा बदलावः प्रो. आशीष कुमार सिंह
मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी- एमएनएनआईटी प्रयागराज के इलेक्ट्रिकल विभाग के प्रो. आशीष कुमार सिंह ने कहा, सस्टेनेबिलिटी को बढ़ाने लिए हमें पाठ्यक्रमों में बदलाव करना होगा। नई जनरेशन को उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग सीमित मात्रा में करना चाहिए ताकि वे रिसोर्स उनके लिए भी बचे रहें। सस्टेनेबिलिटी के लिए यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है, जो रिसोर्स जैसे हमें हमारे पूर्वजों ने दिए हैं, वैसे ही हम भी अपनी अगली पीढ़ी को देकर जाएं।

अनिल कुमार मित्तल बोले, स्मार्ट सिटी की मूल भावना सस्टेनेबिलिटी पर आधारित
स्मार्ट सिटी मुरादाबाद के चीफ इंजीनियर अनिल कुमार मित्तल बोले, स्मार्ट सिटी की मूल भावना सस्टेनेबिलिटी ही है। स्मार्ट सिटी की बेहतर जल निकासी, अंडरग्राउंड इलेक्ट्रिक सप्लाई, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम आदि सस्टेनेबिलिटी के ही अवयव हैं। साथ ही इन सभी में इंजीनियरिंग की किसी न किसी ब्रांच की अहम भूमिका है। मित्तल ने टीएमयू के इंजीनियरिंग स्टुडेंट्स को इंटर्नशिप करने के लिए आमंत्रित किया।

युवाक्ष ठुकराल बोले, एआई का उपयोग बढ़ते ही ऊर्जा की बढे़गी डिमांड
कनाडा की प्रतिष्ठित एआई कंपनी थॉटवर्क्स में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर युवाक्ष ठुकराल ने एआईः द नेक्सट इलेक्ट्रिफिकेशन चैलेंज पर ऑनलाइन बोलते हुए कहा, जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ेगा वैसे ही ऊर्जा की डिमांड बढ़ती ही जाएगी। विभिन्न कंपनियों के डेटा सेंटर भारत में स्थापित होने से देश में इलेक्ट्रिक की डिमांड और बढ़ जाएगी। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए देश में परमाणु ऊर्जा की उत्पादन को भी बढ़ाना होगा। महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड यूनिवर्सिटी, बरेली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. देश दीपक शर्मा ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पर अपने अनुभव साझा किए। बॉन यूनिवर्सिटी-जर्मनी में डायरेक्टर एंड एआई रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. कुलदीप सिंह ने एआई प्रोगेस ऑन बींग रेलेवेन्ट इन जॉब मार्केट पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया। कॉन्फ्रेंस में डॉ. शुभेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. देबांजन रॉय, डॉ. राघवेन्द्र तिवारी, उमेश कुमार सिंह, शशांक मिश्रा, मयूर अग्रवाल के संग-संग इलेक्ट्रिकल, सीएस, मकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिॉनिक्स इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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