सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मधुमक्खी पालन के माध्यम से नई ऊर्जा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंडल के अध्यक्ष तथा राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त रविंद्र साठे और सीईओ लक्ष्मण राऊत ने पत्रकार परिषद में ‘मधु-मित्र’ और ‘मधु-सखी’ पुरस्कारों की घोषणा करते हुए राज्य के उत्कृष्ट मधुपालकों को सम्मानित करने की जानकारी दी। विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर 20 मई को संभाजीनगर में यह सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा।
वर्ष 2026 के लिए ज्ञानेश्वर मलीले (लातूर), गणेश बुरकुल (संभाजीनगर), राजेंद्रदास बैरागी (बुलढाणा) और श्वेता वायाळ (पुणे) को प्रमुख पुरस्कारों के लिए चुना गया है। वहीं चंद्रकांत तरे, संजय मारणे, दयावान पाटील और विद्यानंद आहिरे को विशेष सम्मान देकर ग्रामीण परिश्रम को सरकारी मान्यता प्रदान की जाएगी। खादी मंडल की ‘मधाचे गाव’ योजना राज्य में ग्रामीण विकास का नया अध्याय लिख रही है। 17 करोड़ रुपये की निधि से 10 जिलों के 10 गांवों में इस योजना की शुरुआत की गई है। प्रशिक्षण, मधुपेटियां, सुरक्षा पोशाक और आधुनिक उपकरणों के वितरण से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी आह्वान को आगे बढ़ाते हुए रविंद्र साठे ने “हर घर खादी, घर-घर खादी” का नारा बुलंद किया। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ग्रामीण उद्यमियों द्वारा निर्मित खादी वस्त्र, हस्तनिर्मित कागज उत्पाद, शहद और ग्रामोद्योग उत्पादों को प्राथमिकता दें, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। ग्रामीण विकास, स्वदेशी उद्योग और रोजगार सृजन के त्रिवेणी संगम के रूप में खादी ग्रामोद्योग मंडल अब केवल योजनाएं नहीं चला रहा, बल्कि गांव-गांव में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई क्रांति का शंखनाद कर रहा है। मधु की हर बूंद अब महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास की नई गाथा लिखती दिखाई दे रही है।
