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मुस्लिम वर्ल्ड: ईरान के कारण ट्रंप से नाराज नेतन्याहू! फोन पर तगड़ी भिड़ंत?

सूफी खान

ईरान पर हमले को लेकर ट्रंप – नेतन्याहू में ठन गई है। दोनों के बीच खासी गहमा-गहमी की खबर है। ईरान के साथ अमेरिका न्यूक्लियर समझौता करके निकल जाने की तैयारी में है। बस इसी बात पर फोन पर ट्रंप और नेतन्याहू में बहस हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि ट्रंप ने नेतन्याहू को ईरान से जंग आगे न बढ़ाने के लिए फोन किया था, जिस पर नेतन्याहू बुरी तरह भड़क गए। दोनों नेताओं के बीच ३० मिनट से ज्यादा देर तक बात चली थी।
ये खबर अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस के हवाले से आई है, जिसके मुताबिक, इजरायल के पीएम नेतन्याहू कह रहे हैं कि ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ईरान को इतनी आसानी से सस्ते में नहीं छोड़ना चाहिए। इस पर ट्रंप ने दो टूक कह दिया कि मिडिल ईस्ट में सिर्फ इजरायल ही हमारे लिए सब कुछ नहीं है बाकी देशों का मामला भी देखना पड़ता है।
गौरतलब है कि ७० दिनों से मिडिल ईस्ट में अमेरिका फंसा हुआ है। अमेरिका अपना लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाया, उल्टा तेल और गैस के अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का कंट्रोल भी ईरान के पास चला गया। उस पर से अमेरिका के सहयोगी अरब देशों का ईरान ने बुरा हाल कर दिया। हालात ये हैं कि सुलह-समझौते का सारा फोकस होर्मुज खुलवाने पर आकर टिक गया है। अमेरिकी मीडिया ही दावा कर रहा है कि ट्रंप ने पीएम नेतन्याहू को साफ कह दिया है कि सिर्फ इजरायल ही हमारी प्राथमिकता नहीं है। हमने बाकी पड़ोसी देशों से भी फोन पर बात की है। ट्रंप ने नेतन्याहू से दो टूक कह दिया है कि डिप्लोमेसी की भी एक दुनिया होती है, उसमें समय लगता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि सुलह-समझौते की तरफ ट्रंप का रुझान नेतन्याहू को रास नहीं आ रहा है। जिसके चलते वो नाराज हैं। उसके कारण भी हैं कि अपने सुप्रीम लीडर और कई बड़े नेताओं को खोकर भी ईरान का पलड़ा भारी है। अमेरिका को उसके साथ सीजफायर करना पड़ा और बातचीत की टेबल में आना पड़ा है। ये मिडिल ईस्ट की सियासत के हिसाब से इजरायल के लिए बड़ा झटका है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि पीएम नेतन्याहू के गुस्से का एक अहम कारण ये है कि नेतन्याहू आंतरिक राजनीति में फंसे हुए हैं। इजरायल के विपक्षी नेताओं ने नेतन्याहू के खिलाफ हाथ मिला लिया है। अब नेतन्याहू की कोशिश है कि ईरान में जंग शुरू कर नए सिरे से लोकप्रियता हासिल की जाए। जानकार कहते हैं कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बिना इजरायल का कोई आधार नहीं है। बिना अमेरिका के ईरान इजरायल पर भारी पड़ता है, इसलिए अमेरिका को किसी भी तरह से खित्ते में उलझाए रखना नेतन्याहू की जरूरत है।

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