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एक जमाना था जब अमेरिका का व्हाइट हाउस सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि अभेद्य सुरक्षा का ऐसा प्रतीक था जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति का यह निवास स्थान एक अभेद्य किले के रूप में जाना जाता था, जिसकी तरफ आंख उठाने की हिम्मत भी कोई नहीं कर सकता था। लेकिन हाल की घटनाओं, विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान वार्ता के दौरान महज २१ साल के एक युवक द्वारा पश्चिमी गेट के चेकपॉइंट पर आकर अंधाधुंध २०-३० राउंड गोलियां बरसाने की दुस्साहसिक वारदात ने व्हाइट हाउस की इस साख और इज्जत की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।
आज हालात यह हो गए हैं कि लोग इस सर्वोच्च सुरक्षा वाले स्थान को हल्के में लेने लगे हैं। कोई भी मुंह उठाकर आता है और देश के सबसे सुरक्षित ठिकाने पर हमला करके चला जाता है। यह कोई पहली घटना नहीं है; व्हाइट हाउस पर हमलों और सुरक्षा में चूक का एक लंबा इतिहास रहा है। साल २०११ में ऑस्कर रामीरेज नामक व्यक्ति ने व्हाइट हाउस पर कई राउंड गोलियां चलाई थीं, जिनमें से एक गोली तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा के निवास स्थान की खिड़की पर जाकर लगी थी। इसके बाद साल २०१४ में उमर गोंजालेज नाम का एक शख्स चाकू लेकर बाड़ फांदकर व्हाइट हाउस के मुख्य कमरों के भीतर तक घुस गया था, जिसने सीक्रेट सर्विस की मुस्तैदी की पोल खोल दी थी। अब नासिर बेस्ट नाम के युवक द्वारा चेकपॉइंट पर खुलेआम की गई गोलीबारी ने यह साबित कर दिया है कि उपद्रवियों के मन से कानून और इस किले का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है।
सुरक्षा घेरे की गरिमा तार-तार
हालांकि, जवाबी कार्रवाई में सीक्रेट सर्विस ने संदिग्ध को ढेर कर दिया और राष्ट्रपति सुरक्षित रहे, लेकिन इस तरह की बार-बार होने वाली घटनाओं ने व्हाइट हाउस के सुरक्षा घेरे की गरिमा को तार-तार कर दिया है। यह वैश्विक स्तर पर अमेरिका की छवि को भी गंभीर चोट पहुंचाता है। यहां पर कभी परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, और आज हालात ऐसे हैं कि सरेआम फायरिंग हो रही है। अगर मुंबईया भाषा में बोले तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि व्हाइट हाउस की सिक्योरिटी सिस्टम की ‘वाट’ लग गई!
