बुद्धिजीवियों

ज्ञानियों, ध्यानियों,
साधकों, विचारकों,
विद्वानों—
जागो!
शब्द उठाओ,
दागो
एक साथ,
एक बार,
एक जगह,
एकजुटता के साथ
उस किले पर,
जहां विनाश है,
अंधविश्वास है,
सर्वनाश है।
और रख दो
अपना
जलता हुआ विचार,
लोकमंगल का,
एकतरफा।
इस समय
जोखिम उठाते हुए,
मुक्तिबोध की तरह
निर्भीक होकर।।

-अन्वेषी

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