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पुस्तक समीक्षा: ‘जितेन्द्र पाण्डेय- व्यक्तित्व और सृजन’ हिंदी साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण कृति

रामकुमार

राजेश विक्रांत द्वारा संपादित पुस्तक ‘जितेंद्र पांडेय: व्यक्तित्व और सृजन’ हिंदी साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण और संग्रहणीय कृति है। यह पुस्तक केवल एक साहित्यकार के जीवन और साहित्यिक अवदान का परिचय नहीं देती, बल्कि उनके संपूर्ण रचनात्मक व्यक्तित्व को विभिन्न दृष्टियों से समझने और मूल्यांकित करने का अवसर भी प्रदान करती है। हिंदी साहित्य में जितेंद्र पांडेय का योगदान बहुआयामी रहा है और इस पुस्तक में उनके साहित्यिक जीवन, चिंतन, रचना-दृष्टि तथा सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों का व्यापक एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज भी है, जिसमें समकालीन साहित्यिक गतिविधियों का पता चलता है।
पुस्तक का संपादन अत्यंत सजगता और गंभीरता के साथ किया गया है। इसमें संकलित लेख, संस्मरण, समीक्षाएँ तथा आलोचनात्मक टिप्पणियाँ पाठकों को पांडेय जी के साहित्यिक व्यक्तित्व के विविध आयामों से परिचित कराती हैं। उनके लेखन की विशिष्टताओं, भाषा-शैली, विषय-वस्तु की व्यापकता और मानवीय संवेदनाओं की गहराई को विभिन्न विद्वानों व साहित्यकारों— जगदीश बरनवाल ‘कुंद’, डॉ. ओम निश्चल, राजेन्द्र तिवारी, चंडी प्रसाद मिश्र ‘चंचल’, ह्रदयेश मयंक, डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय, श्रीनारायण तिवारी, प्रेम शुक्ल, आचार्य पवन त्रिपाठी, डॉ. अलका पोतदार, काकासाहेब वालुंजकर, सुनील माने, लालचंद तिवारी, डॉ. सत्येंद्र पूजन प्रताप त्रिपाठी, डॉ. पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’, संजय पवार, मंगल देव तिवारी ‘राज’, तेजस सुमा श्याम, उदयराज सिंह, सुमन सिंह, बरुण कुमार पांडेय, सौम्या पांडेय, शैलजा, अदिति व आराध्या, डॉ. शिवम तिवारी, क्षमा दुबे, डॉ. इंद्रकुमार विश्वकर्मा, राजीव रोहित, लाल बहादुर चौरसिया ‘लाल’, हरि मृदुल, डॉ. वर्षा महेश ‘गरिमा’, गंगाशरण सिंह, अमित द्विवेदी, भारती संजीव श्रीवास्तव, प्रतिभा मिश्रा, योगेश सुदर्शन मिश्र, मनोजचंद तिवारी ‘माधव’, हेमलता त्रिपाठी, सुमन मिश्र, आफताब आलम, डॉ. जावेद आलम खान, रोहिणी शशांक मिश्र, अनिल तिवारी, डॉ. साधना शर्मा, विनय शर्मा ‘दीप’, संतोष कुमार सिंह, राज किशोर तिवारी एवं नंदलाल ‘क्षितिज’ ने अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।
साथ ही ‘जितेंद्र पांडेय: व्यक्तित्व व सृजन’ में पद्मश्री डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, डॉ. गौरी माहुलीकर, चिन्मय फाउंडेशन, केरल, भुवेंद्र त्यागी, संपादक, दैनिक भास्कर, मुंबई, यदुराज सिंह, अतिरिक्त आयुक्त (अन्वेषण), आयकर, मुंबई, डॉ. मंजरी शुक्ला, सदस्य, एनसीईआरटी एवं वरिष्ठ आकाशवाणी उद्घोषक, जबलपुर तथा अभिजीत राणे (समूह संपादक, मुंबई मित्र व वृत्त मित्र) की शुभकामनाएँ भी हैं। इस कारण यह पुस्तक केवल अभिनंदन-ग्रंथ नहीं रह जाती, बल्कि एक गंभीर साहित्यिक अध्ययन सामग्री का स्वरूप ग्रहण कर लेती है।
जितेंद्र पांडेय की रचनाएँ समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को व्यक्त करती हैं। उनकी लेखनी में जीवन के विविध रंग, संघर्ष, संवेदनाएँ और यथार्थ का सशक्त चित्रण मिलता है। पुस्तक में उनके साहित्यिक विकासक्रम, रचनात्मक उपलब्धियों तथा समकालीन हिंदी साहित्य में उनके योगदान को विस्तार से रेखांकित किया गया है। साथ ही, उनके व्यक्तित्व के उन मानवीय पक्षों को भी उजागर किया गया है, जो उन्हें एक उत्कृष्ट साहित्यकार के साथ-साथ एक संवेदनशील और सजग व्यक्ति के रूप में स्थापित करते हैं।
यह पुस्तक हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्यापकों तथा साहित्य-प्रेमियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। शोध और संदर्भ सामग्री के रूप में इसकी महत्ता निर्विवाद है। जो पाठक जितेंद्र पांडेय के साहित्य से पहले से परिचित हैं, उन्हें उनके कृतित्व का एक समग्र परिप्रेक्ष्य प्राप्त होता है, वहीं नए पाठकों के लिए यह पुस्तक उनके साहित्यिक संसार में प्रवेश का सशक्त माध्यम सिद्ध होती है।
राजेश विक्रांत ने अपने संपादकीय कौशल और साहित्यिक दृष्टि के माध्यम से इस पुस्तक को एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज का स्वरूप प्रदान किया है। उनकी परिश्रमपूर्ण संपादकीय दृष्टि के कारण पुस्तक में विषयगत संतुलन, तथ्यात्मक प्रामाणिकता और आलोचनात्मक गंभीरता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
मुझे प्रसन्नता है कि इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक में मेरे लेख को भी स्थान प्रदान किया गया है। इसके लिए मैं आदरणीय संपादक राजेश विक्रांत जी के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता और धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ। यह मेरे लिए सम्मान और संतोष का विषय है कि मुझे हिंदी साहित्य के एक महत्त्वपूर्ण साहित्यकार पर केंद्रित इस मूल्यवान कृति का हिस्सा बनने का अवसर प्राप्त हुआ।

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