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संपादकीय :  अब दिन में भी पुणे बंद करोगे?

महाराष्ट्र की पुलिस व्यवस्था की धज्जियां उड़ानेवाला एक और हादसा पुणे में हुआ है। पुणे में जहरीली शराब ने अब तक १३ लोगों की जान ले ली है। यह खबर अंदर तक झकझोर देने वाली है। यह सिर्फ एक हादसा या दुर्घटना नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने जो शासन व्यवस्था बनाई है, उसकी नाकामी है। कल ही कैबिनेट बैठक में देश का मार्गदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि देश में गर्मी बढ़ गई है, इसलिए भरपूर पानी पीजिए। लेकिन पुणे के मजदूर वर्ग ने मोदी के इस संदेश को अलग ही ढंग से ले लिया। उन्होंने जहरीली शराब पीकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। १३ मृतकों के परिवार सड़क पर आ गए। क्या सरकार अब इन १३ परिवारों को भी कोई आर्थिक मदद करेगी? ये मौतें सरकार की भ्रष्ट व्यवस्था की वजह से हुई हैं इसलिए इस हत्या का पाप सरकार के सिर पर ही है। पुलिस और आबकारी (उत्पाद शुल्क) विभाग की सरपरस्ती के बिना जहरीली शराब बिकना नामुमकिन है। गृहमंत्री के तौर पर फडणवीस का कामकाज दिन-ब-दिन बेकार होता जा रहा है। वे चुनावों के फेर में और अपनी राजनीतिक गोटियां सेट करने में व्यस्त हैं। गृह मंत्रालय का सबसे ज्यादा इस्तेमाल फिलहाल अपने राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने, उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर ‘ब्लैकमेल’ करने के लिए किया जा रहा है। यही वजह है कि पुलिस तंत्र का जमीनी हकीकत से संपर्क टूट चुका है। मुख्यमंत्री अपराधियों पर बुलडोजर चलाने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन हकीकत में कल १३ परिवारों पर इस
जहरीली शराब कांड का
बुलडोजर चल गया। गृहमंत्री होने के नाते इस हत्याकांड की जिम्मेदारी देवेंद्र फडणवीस को खुद लेनी चाहिए। पुणे में बहुत बड़ी तादाद में कामकाजी और मजदूर वर्ग रहता है। वे सस्ती देसी शराब पीते हैं। ऐसी शराब में मेथनॉल जैसे केमिकल मिलाए जाते हैं, जिससे शराब जहर बन जाती है। इसी वजह से गरीबों की मौत होती है। महाराष्ट्र में फडणवीस और देश में मोदी की सरकार गरीबों के बारे में सोचती हुई दिखाई नहीं देती। उनके दावे बड़े-बड़े होते हैं, लेकिन जमीनी काम शून्य है। अमीरों को महंगी और अच्छी शराब मिलती है, उनके पीने को रसूख और सुरक्षा हासिल है, लेकिन गरीबों की थकान मिटाने का सहारा इस जहरीली शराब के साथ हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। पुणे के इस शराब कांड का यही कड़वा सच है। जहरीली शराब से होनेवाली मौतें सिर्फ महाराष्ट्र में नहीं, बल्कि पूरे भारत में हो रही हैं। बिहार, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में शराब कांड के कारण जानें गई हैं। इस भ्रष्ट रैकेट को राजनीतिक शह मिले बिना यह शराब बेचना मुमकिन ही नहीं है। पुणे के जिस इलाके में यह हादसा हुआ, वहां के हर स्तर के जनप्रतिनिधियों के लिए यह बेहद शर्मनाक बात है। अगर ये नेता ठेकेदारी और कमीशनखोरी से थोड़ा वक्त निकालकर अपने इलाकों की जहरीली शराब, जुए और सट्टे के अड्डों को बंद कराने के लिए जी-जान लगा दें तो ऐसी बेगुनाह जानें नहीं जाएंगी और गरीबों के परिवार बेसहारा नहीं होंगे। पुणे जैसे शहर में आज अपराध जगत का
हर ‘एक्शन’
खुलेआम हो रहा है। यहां डकैतियां पड़ रही हैं, मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार कर उनकी हत्या की जा रही है। सरेराह कोयते (दरांती), तलवारें और बंदूकें लहराकर सड़कों को खून से नहलाया जा रहा है। उसमें आज जहरीली शराब के इस हत्याकांड का एक और पन्ना जुड़ गया। यानी गृहमंत्री के माथे पर ‘शराब कांड का कलंक’ भी लग गया। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ इलाकों में ‘लाइसेंस के बिना बननेवाली’ (हातभट्टी) शराब धड़ल्ले से बेची जा रही है। सच तो यह है कि पुणे और मावल का इलाका देसी शराब का एक बड़ा अड्डा बन चुका है। ऐसे में पुलिस और स्थानीय नेता क्या कर रहे हैं? अब कहा जा रहा है कि पुलिस ने उस शराब बेचनेवाले के साथ कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है और जिस अड्डे पर बैठकर लोग यह शराब पी रहे थे, उस पर कार्रवाई की है। १३ लोगों की मौत हो जाने के बाद पुलिस की यह नींद टूटी है। आम दिनों में हिंदू-मुसलमान, लव जिहाद, धर्मांतरण, ईद की कुर्बानियां जैसे मुद्दों पर नव-हिंदूवादी स्थानीय संगठन और नेता खूब आवाज उठाते हैं और आंदोलन करते हैं। उनकी नजर में ऐसे समय पर हिंदू खतरे में आ जाता है। लेकिन जहरीली शराब बेचनेवाले और उसे पीकर मरनेवाले भी हिंदू ही हैं, फिर भी ऐसे वक्त में ये लोग चुप बैठे हैं। दूसरी तरफ, गैर-हिंदुओं की जगहों पर बुलडोजर चलाने वाली सरकार जहरीली शराब के अड्डों पर बुलडोजर नहीं चलाती, क्योंकि वे सत्ताधारियों के संरक्षण में ही लोगों को जहर परोस रहे होते हैं। पुणे के पुलिस कमिश्नर ने अपराध पर लगाम लगाने के लिए रात १० बजे के बाद ‘बंदी’ का आदेश जारी किया था, लेकिन यहां रात में नहीं बल्कि दिन के उजाले में जहरीली शराब कांड से १३ लोगों की हत्या हो गई। अब क्या दिन में भी पुणे बंद करेंगे?

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