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मेगा जॉब फेयर बना राजनीतिक शो?..रोजगार की आस में उमड़े युवा

– खानापूर्ति करने पहुंचे भाजपा विधायक

-नौकरी से ज्यादा चर्चा फोटो सेशन की

सामना संवाददाता / मुंबई

बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने का एक और नजारा उस वक्त देखने को मिला, जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा आयोजित मेगा जॉब फेयर में भाजपा विधायक संजय उपाध्याय लाव-लश्कर के साथ पहुंचे। इस कार्यक्रम में रोजगार की तलाश में भटक रहे हजारों हताश युवाओं के बीच विधायक ने केवल अपनी राजनीतिक छवि चमकाने और कैमरे के सामने पोज देने का काम किया।
कड़ी धूप और भारी अव्यवस्था के बीच नौकरियों के लिए लंबी लाइनों में खड़े युवाओं से विधायक संजय उपाध्याय ने औपचारिक बातचीत का दिखावा तो किया, लेकिन उनके पास इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं था कि डिग्री हाथ में लेकर घूम रहे युवाओं को आखिर कब तक इस तरह मेलों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
मेगा जॉब फेयर की जमीनी हकीकत
मेले में पदों की संख्या के मुकाबले आवेदकों की तादाद कई गुना अधिक थी, जिससे सरकार के रोजगार देने के दावों की हकीकत सामने आ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस तरह के जॉब फेयर युवाओं को असल रोजगार देने के बजाय केवल राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनकर रह गए हैं।
उचित प्रबंधन न होने के कारण नौकरी की तलाश में आए युवाओं को घंटों परेशान होना पड़ा, जबकि नेता और उनके समर्थक सुरक्षा घेरे में घूमते नजर आए। यह पूरा दृश्य साफ तौर पर दर्शाता है कि सत्ताधारी दल के नेता युवाओं की बेरोजगारी को भी एक भव्य आयोजन में बदलकर अपनी राजनीति चमकाने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
युवाओं का आक्रोश
मेले में आए कई उम्मीदवारों ने दबी जुबान में कहा कि नेता लोग यहां केवल अपना चेहरा चमकाने और इवेंट को सफल दिखाने आते हैं। हमें खोखले आश्वासनों और फोटो सेशन की नहीं, बल्कि स्थायी और सुरक्षित रोजगार की जरूरत है।

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