मुख्यपृष्ठनए समाचारमनपा की सुस्ती में फंसा मृणालताई गोरे फ्लाईओवर

मनपा की सुस्ती में फंसा मृणालताई गोरे फ्लाईओवर

– करोड़ों खर्च के बावजूद अधूरा है प्रोजेक्ट

– ट्रैफिक जाम से जनता बेहाल

द्रुप्ति झा / मुंबई

गोरेगांव का बहुचर्चित मृणालताई गोरे फ्लाईओवर अब मनपा की सुस्त कार्यशैली और बदहाल योजना का प्रतीक बनता जा रहा है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यह प्रोजेक्ट वर्षों से अधूरा पड़ा है और रोजाना ट्रैफिक जाम में फंसने वाली जनता इसकी कीमत चुका रही है। खराब प्लानिंग, बार-बार बदला गया डिजाइन और काम में लगातार देरी के कारण अब यह फ्लाईओवर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बन गया है।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि मनपा की कछुआ गति ने पूरे इलाके की यातायात व्यवस्था को चरमरा दिया है। सुबह-शाम घंटों लगने वाले जाम ने लोगों के संयम के बांध को तोड़ दिया है। हालात बिगड़ते देख उप महापौर संजय घाडी ने हाल ही में मौके का दौरा कर अधिकारियों को काम तेज करने के निर्देश दिए, लेकिन नागरिकों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल दिखावा भर है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि समय रहते निगरानी और जवाबदेही तय की गई होती, तो आज उपनगर की जनता को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। स्थानीय रहिवासियों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी डेडलाइन बढ़ाने और आश्वासन देने में व्यस्त रहा, जबकि जमीन पर काम की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, डिजाइन में बदलाव और लंबे विलंब के कारण परियोजना की लागत मूल अनुमानित १९७ करोड़ रुपए से बढ़कर २५० करोड़ रुपए के पार पहुंच गई है। इसके बावजूद काम पूरा होने की स्पष्ट समयसीमा अब तक तय नहीं हो सकी है।
फ्लाईओवर बना सुस्ती का प्रतीक
गोरेगांव का मृणालताई गोरे फ्लाईओवर मनपा की धीमी कार्यशैली का प्रतीक बन गया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद प्रोजेक्ट वर्षों से अधूरा पड़ा है। खराब प्लानिंग और बार-बार डिजाइन बदलाव के चलते निर्माण में भारी देरी हुई, जिससे क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या गंभीर हो गई है।

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