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भारत और चीन सीमा पर फिर टेंशन…ड्रैगन ने बनाया हथियारों का पाताल लोक!

-सैकड़ों लॉन्च पैड, बंकर और कम्युनिकेशन नेटवर्क किया तैयार

-सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

भारत और चीन सीमा पर एक बार फिर टेंशन का माहौल बन गया है। इस बीच ड्रैगन सीमा के निकट हथियारों का ‘पाताल लोक’ भी बना रहा है, जिसमें सैकड़ों लॉन्च पैड, बंकर और कम्युनिकेशन नेटवर्क तैयार किए जा रहे हैं। यह खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है।
वहीं दूसरी ओर चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता भारत के लिए काफी चिंता का विषय है। भारत और चीन की सीमा पर तनाव बना हुआ है। अगर चीन अपनी परमाणु क्षमता को इतनी तेजी से बढ़ा रहा है तो भारत को भी अपनी रणनीतिक क्षमता पर ध्यान देने की जरूरत है। चीन रेगिस्तान में जो विशाल परिसर बना रहा है। वह सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि एक मजबूत परमाणु प्रतिरोध की तैयारी है। अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन सेकंड स्ट्राइक क्षमता को इतना मजबूत कर रहा है कि कोई भी देश उसे आसानी से निशाना नहीं बना सके।

परमाणु शक्ति और मजबूत करने में जुटा
सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि चीन अपने सबसे लंबी दूरी की मिसाइलों वाले साइलो क्षेत्रों के पास सैकड़ों लॉन्च पैड, बंकर और कम्युनिकेशन नेटवर्क बना रहा है। यह निर्माण चीन की परमाणु शक्ति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। चीन पहले से ही ऐसी मिसाइलें बना चुका है जो अमेरिका के किसी भी शहर तक पहुंच सकती हैं। अब वह इन मिसाइलों को और सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर इंप्रâास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है।
अमेरिका के साथ चीन की परमाणु प्रतिस्पर्धा
अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ रहा है, खासकर ताइवान को लेकर। चीन का मानना है कि अमेरिका ताइवान मुद्दे पर हस्तक्षेप कर सकता है। ऐसे में चीन अपनी परमाणु क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन २०३० तक १,००० परमाणु वॉरहेड बना सकता है। चीन अब साइलो-बेस्ड मिसाइलों के साथ-साथ मोबाइल लॉन्चर और सबमरीन-बेस्ड मिसाइलों पर भी जोर दे रहा है। पूर्वी शिनजियांग क्षेत्र में दो अष्टकोण आकार के विशाल सैन्य परिसर बनाए गए हैं। इनमें से एक उत्तरी अष्टकोण और दूसरा दक्षिणी अष्टकोण है। इनके चारों ओर सैकड़ों कंक्रीट पैड (लॉन्च पैड्स) बनाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये पैड मोबाइल मिसाइल लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इन अष्टकोण संरचनाओं में सैनिकों के रहने की व्यवस्था, बड़े वाहनों के लिए शेड, हथियार भंडारण बंकर और कमांड सेंटर भी हैं।

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