सामना संवाददाता / मुंबई
हर मानसून में जलभराव, ट्रैफिक जाम और घंटों ठप पड़ती जिंदगी से जूझने वाली मुंबई को इस बार फिर तकनीक के भरोसे बचाने का दावा किया जा रहा है। मुंबई महानगरपालिका ने शहरभर में लगाए गए ५४७ डीवॉटरिंग पंपों को ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (आईओटी) आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ दिया है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ डिजिटल डैशबोर्ड और सेंसर मुंबई को हर साल होने वाले जलभराव से बचा पाएंगे?
मनपा आयुक्त अश्विनी भिडे ने शुक्रवार को नए ‘डीवॉटरिंग पंप मॉनिटरिंग सिस्टम’ का निरीक्षण किया और दावा किया कि अब जलभराव की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। हालांकि नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष नई तकनीक और बड़े दावों के बावजूद मुंबई की सड़कों पर बारिश के कुछ घंटों में ही घुटनों तक पानी भर जाता है। मनपा के अनुसार, शहर, पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों में कुल ५४७ पंप लगाए गए हैं। इन पंपों पर आईओटी डिवाइस और डिजिटल सेंसर लगाए गए हैं, जो कंट्रोल रूम को रियल टाइम डेटा भेजेंगे। लेकिन आलोचकों का कहना है कि असली समस्या नालों की सफाई, जलनिकासी व्यवस्था और जर्जर इंप्रâास्ट्रक्चर की है, जिस पर अब भी ठोस काम नजर नहीं आता।
पंप ऑपरेटरों की जियो-फेसिंग और लाइव मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि तकनीक पर करोड़ों खर्च करने के बजाय स्थायी समाधान पर ध्यान देना जरूरी है। मुंबईकरों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार बारिश में शहर सचमुच बचेगा या फिर हर साल की तरह ‘स्मार्ट सिस्टम’ के बावजूद मुंबई फिर पानी में डूबती नजर आएगी?
क्या खत्म होगा जलभराव?
मनपा डिजिटल सेंसर और रियल टाइम मॉनिटरिंग को समाधान बता रही है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि असली समस्या खराब जलनिकासी और अधूरा इंप्रâास्ट्रक्चर है। सवाल यही है कि क्या इस मानसून मुंबई सचमुच बचेगी या फिर स्मार्ट सिस्टम के बावजूद सड़कें पानी में डूबती नजर आएंगी?
स्मार्ट सिस्टम पर टिकी बारिश से राहत की उम्मीद
मुंबई मनपा ने शहरभर में लगाए गए ५४७ डीवॉटरिंग पंपों को आईओटी आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ दिया है। दावा किया जा रहा है कि अब जलभराव की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। हालांकि हर साल बारिश में डूबती मुंबई को देखते हुए नागरिक इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं।
