मुख्यपृष्ठस्तंभसाहित्य शलाका: नई शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा

साहित्य शलाका: नई शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा

प्रो. दयानंद तिवारी

भाग-१

भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि ज्ञान, विचार, दर्शन और संस्कृति की अनवरत प्रवाहित होती हुई एक महान परंपरा है। विश्व के अनेक देश जब शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्ति का साधन मानकर आगे बढ़ रहे थे, तब भारत ने शिक्षा को मनुष्य निर्माण, चरित्र निर्माण और समाज निर्माण का माध्यम माना। हमारी शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं था, बल्कि व्यक्ति के भीतर विवेक, संवेदना, नैतिकता, कर्तव्यबोध और राष्ट्रबोध का विकास करना था।
नई शिक्षा नीति २०२० इसी भारतीय दृष्टि को पुन: स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह नीति केवल पाठ्यक्रम बदलने की योजना नहीं है, बल्कि शिक्षा के माध्यम से भारत को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए आधुनिक विश्व के अनुरूप आगे बढ़ाने का संकल्प है। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा, कौशल विकास, शोध, नवाचार और चरित्र निर्माण को विशेष महत्व दिया गया है।
भारतीय ज्ञान परंपरा का अर्थ केवल वेद, उपनिषद, पुराण या प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन भर नहीं है। इसका अर्थ है-भारत की उस समग्र दृष्टि को समझना, जिसमें जीवन, प्रकृति, समाज, परिवार, राष्ट्र और मानवता के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रेरणा मिलती है। हमारे ऋषियों ने कहा है ‘सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात वही विद्या है जो मनुष्य को अज्ञान, संकीर्णता और बंधनों से मुक्त करे। शिक्षा यदि केवल नौकरी दे और जीवन जीने की समझ न दे, तो वह अधूरी है।
नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं को विशेष महत्व देती है। यह अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बच्चा सबसे अच्छे ढंग से अपनी मातृभाषा में सोचता, समझता और अभिव्यक्त करता है। भारत जैसे बहुभाषी देश में भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और पहचान का आधार है। जब विद्यार्थी अपनी भाषा में शिक्षा प्राप्त करता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और ज्ञान ग्रहण करने की क्षमता भी मजबूत होती है।
भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। गुरु केवल विषय पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं होता, वह जीवन दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। आज आवश्यकता है कि शिक्षक फिर से केवल सूचना देने वाले न रहें, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण के प्रेरक बनें। नई शिक्षा नीति शिक्षक की भूमिका को इसी दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
इस नीति की एक बड़ी विशेषता यह भी है कि यह शिक्षा को रटने की प्रवृत्ति से बाहर निकालकर समझ, प्रयोग, कौशल और सृजन की ओर ले जाना चाहती है। भारतीय परंपरा में ज्ञान सदैव व्यवहार से जुड़ा रहा है।

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