डॉ. बालकृष्ण मिश्र
काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद
गुरुजी, क्या मेरी कुंडली मांगलिक है और मेरी राशि क्या है? कृपया बताएं।
– अनुज गायकवाड
जन्म: २९ सितंबर २०००, समय ३:५५, कल्याण पूर्व, ठाणे
अनुज जी, आपका जन्म शुक्रवार के दिन चित्रा नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है। आपकी राशि तुला बनती है। यदि लग्न के आधार पर देखा जाए तो आपका जन्म कुंभ लग्न में हुआ है। कुंभ लग्न का स्वामी शनि आपकी कुंडली के चतुर्थ भाव में स्थित है और उसी स्थान पर बृहस्पति भी विराजमान होकर आपके करियर को पूर्ण रूप से देख रहा है। इसलिए आपका करियर अच्छा रहेगा। मंगल ग्रह आपकी कुंडली के सप्तम भाव में स्थित होकर कुंडली को मांगलिक बना रहा है। साथ ही सप्तम भाव का स्वामी सूर्य अष्टम भाव में स्थित है, जिससे मंगल दोष का प्रभाव और अधिक बढ़ गया है। इस प्रकार आपकी कुंडली मांगलिक है। मांगलिक कुंडली होने के कारण जीवनसाथी का चयन करने से पहले अर्क विवाह तथा मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ अवश्य करवाएं। शुभ फल की प्राप्ति के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा का तीन बार पाठ करें तथा शनिवार को हनुमान जी के दर्शन अवश्य करें। जीवन के विस्तृत फलादेश के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरुजी, मेरे विवाह में विलंब क्यों हो रहा है? कृपया कोई उपाय बताएं।
– वैभव श्रीवास्तव
जन्म: १४ नवंबर १९९७, रात्रि ९:४६, घाटकोपर पश्चिम, मुंबई
वैभव जी, आपका जन्म शुक्रवार के दिन कृत्तिका नक्षत्र के प्रथम चरण में हुआ है। राशि के आधार पर आपकी राशि मेष बनती है। यदि लग्न के आधार पर देखा जाए तो आपका जन्म कर्क लग्न में हुआ है। वर्तमान समय में आपकी राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा है। आपकी कुंडली में सप्तम तथा अष्टम भाव के स्वामी शनि हैं। विवाह का विचार मुख्य रूप से सप्तम भाव से किया जाता है। शनि की साढ़ेसाती के दौरान विवाह निश्चित होने में विभिन्न प्रकार की बाधाएं और विलंब देखने को मिलते हैं। आपकी कुंडली मांगलिक नहीं है, लेकिन द्वितीय भाव के स्वामी सूर्य चौथे भाव में नीच राशि में स्थित हैं। इसी कारण जीवनसाथी के चयन में विभिन्न प्रकार की अड़चनें आ रही हैं। साथ ही बृहस्पति भी आपकी कुंडली में नीच राशि के हैं। सूर्य को अनुकूल बनाने के लिए प्रत्येक रविवार को सूर्यदेव को अर्घ्य दें तथा उन्हें प्रणाम करें। बृहस्पति को अनुकूल बनाने के लिए प्रतिदिन यूट्यूब के माध्यम से विष्णु सहस्रनाम का पाठ सुनें। ऐसा करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होंगी। जीवन के विस्तृत फलादेश के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरुजी, मेरी परेशानियां क्यों नहीं जा रही हैं? कृपया कोई उपाय बताएं।
– हरीश शतपुटे
जन्म: २९ दिसंबर १९८५, समय ३:२५, ठाकुर्ली, ठाणे
हरीश जी, आपका जन्म रविवार के दिन हुआ है। आपकी राशि कर्क बनती है तथा आपका जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ है। लग्न के आधार पर आपका जन्म वृषभ लग्न में हुआ है। वृषभ लग्न का स्वामी शुक्र है। यदि लग्नेश अष्टम भाव में स्थित हो जाए तो व्यक्ति के जीवन में आकस्मिक घटनाएं और परेशानियां बनी रहती हैं। आपकी कुंडली में भी ऐसा ही योग दिखाई देता है, इसलिए समस्याएं आसानी से साथ नहीं छोड़तीं।
बृहस्पति आपकी कुंडली में अष्टम तथा लाभ भाव के स्वामी हैं और नीच राशि में होकर भाग्य भाव में स्थित हैं। इससे भाग्य पक्ष कुछ कमजोर हुआ है, लेकिन आप अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से बहुत कुछ प्राप्त करेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है। बृहस्पति की पंचम दृष्टि लग्न पर, सप्तम दृष्टि पराक्रम भाव पर तथा नवम दृष्टि पंचम भाव पर पड़ रही है। इसलिए अपने प्रयासों के बल पर आप जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त करेंगे। आपकी कुंडली में अर्ध कालसर्प योग भी बना हुआ है। इस योग की वैदिक विधि से पूजा अवश्य कराएं। जीवन के विस्तृत फलादेश के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण गोल्ड बनवाएं।
