सामना संवाददाता / मुंबई
वैश्विक आपूर्ति में बाधाओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी निकट भविष्य में हिंदुस्थान के आर्थिक विकास के लिए जोखिम पैदा करने के साथ महंगाई को भी बढ़ा सकती है। यह बात भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट २०२५-२६ में कही है।
रिपोर्ट में आरबीआई के अर्थशास्त्रियों ने लिखा है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मध्यम रहने के बावजूद वर्ष २०२६-२७ में भारतीय अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। मजबूत व्यापक आर्थिक आधार इसके समर्थन में हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी रहने वाला संघर्ष अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकता है। अर्थशास्त्रियों ने कहा कि यदि मध्य-पूर्व के संघर्ष का प्रतिकूल प्रभाव निकट अवधि में सीमित रहता है तो मार्च २०२७ में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष २०२६-२७ में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर ६.९ प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, इसके सामने जोखिम नकारात्मक दिशा में अधिक दिखाई दे रहे हैं।
विनिमय दर में बदलाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई बढ़ने के जोखिम कई अन्य कारणों से भी पैदा हो सकते हैं। भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक स्तर पर र्इंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल, उत्पादन लागत और मजदूरी पर पड़ने वाला असर तथा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव महंगाई को और बढ़ा सकते हैं। इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए वर्ष २०२६-२७ के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई दर ४.६ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, लेकिन इसके ऊपर जाने का खतरा अधिक है।
