मुख्यपृष्ठनए समाचारअरविंदो ने कहा था सनातन धर्म ही है भारतीय राष्ट्रवाद की आत्मा-प्रो.राधेश्याम

अरविंदो ने कहा था सनातन धर्म ही है भारतीय राष्ट्रवाद की आत्मा-प्रो.राधेश्याम

-श्री अरविंद के उत्तरपाड़ा भाषण पर विमर्श

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

कमलानेहरु मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो.राधेश्याम सिंह ने शनिवार को महान क्रांतिकारी व साधक श्री अरविंद के चर्चित उत्तरपाड़ा भाषण पर आयोजित विमर्श में कहा कि, अरविंदो ने स्पष्ट रूप से प्रतिपादित किया था कि सनातन धर्म ही भारतीय राष्ट्रवाद की आत्मा है। उन्होंने बताया कि भारत की राष्ट्रीय चेतना और आध्यात्मिक विरासत एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई हैं। वे
श्री अरविंदो सोसाइटी के बढ़ैयावीर स्थित परिसर में “उत्तरपाड़ा भाषण का सार” विषय पर एक भव्य एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम में बोल रहे थे। वातावरण अत्यंत शांत, दिव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय कोर ग्रुप, पुडुचेरी के सदस्य डॉ. जे.पी. सिंह के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने श्री अरविंदो के जीवन, उनके आध्यात्मिक दर्शन तथा उत्तरपाड़ा भाषण के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए विषय की भूमिका प्रस्तुत की।
इसके पश्चात सोसाइटी के अध्यक्ष बी.बी. सिंह ने सामूहिक ध्यान का संचालन किया, जिससे उपस्थित लोगों को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक एकाग्रता का अनुभव प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता कमला नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. सिंह ने अरविंदो के जीवन और उनके विचारों का विस्तृत विवेचन किया। बताया कि अलीपुर बम कांड में कारावास के दौरान श्री अरविंदो के जीवन में एक अद्भुत आध्यात्मिक परिवर्तन आया, जिसने उन्हें एक क्रांतिकारी राष्ट्रवादी से महायोगी और सिद्ध साधक के रूप में स्थापित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुल्तानपुर मेडिकल कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. सलिल श्रीवास्तव ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने उत्तरपाड़ा भाषण के आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व पर गहन विचार व्यक्त किए और इसे आज के समय में भी अत्यंत प्रासंगिक बताया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ. विनोद सिंह, डॉ. आर.ए. वर्मा, एच.डी. राम, डॉ. आशीष, डॉ. संगीता श्रीवास्तव, श्रीमती पल्लवी वर्मा, एस.बी. सिंह तथा सोसाइटी के सचिव एस.पी. सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने श्री अरविंदो के विचारों से प्रेरणा ग्रहण करते हुए आध्यात्मिक जागरण एवं राष्ट्र गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

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