मुख्यपृष्ठस्तंभझांकी : बांग्लादेश से पिछड़ा देश

झांकी : बांग्लादेश से पिछड़ा देश

अजय भट्टाचार्य

विश्व मुद्रा कोष के २०२६ के डेटा के मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद सहभागिता २,८१२ अमेरिकी डॉलर है, जो बांग्लादेश के प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद २,९११ अमेरिकी डॉलर से ९९ डॉलर कम है। यह आंकड़ा भारत को बांग्लादेश और केन्या के बीच रखता है, जिसकी प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद सहभागिता २०२६ में २,७१० अमेरिकी डॉलर है, जो २०२४ में २,१३२ अमेरिकी डॉलर थी। २०२५ में भारत की प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद सहभागिता २,६७५ अमेरिकी डॉलर थी, जो बांग्लादेश के व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद सहभागिता २,६३५ अमेरिकी डॉलर से थोड़ी ज्यादा थी। हालांकि यह पहली बार नहीं है, २०२३ और २०२४ में भी बांग्लादेश भारत से आगे था। जबकि भारत की पूरी अर्थव्यस्था लगभग ४.१ ट्रिलियन डॉलर के साथ कहीं ज्यादा बड़ी है, लेकिन इसकी प्रति व्यक्ति आय अभी भी कम है। इसलिए जब आप सत्ता समर्थक के मुखारविंद से यह सुनें कि हम विश्व की फलाने क्रम की अर्थव्यवस्था हैं, तब यह जरूर पूछिए कि एक सामान्य भारतीय नागरिक की आमदनी कितनी है?
महंगाई से अब्दुल टाइट
पेट्रोल सात-आठ रुपए क्या बढ़ गया लोग बेकार ही फनफनाने लगे हैं। हमारे विश्वगुरु को देखो। उनसे कुछ प्रेरणा लो। वैâसे वे पिछले २५ साल से बिना छुट्टी लिए, बिना रुके, बिना थके १८-१८ घंटे काम कर रहे हैं? और जब से होर्मुज बंद हुआ है, सुना है तब से २२-२२ घंटे काम कर रहे हैं। सब सुख सुविधा, मोह माया छोड़, २ जोड़ी सूती कप़ड़ों में वे एक फकीर की तरह देश सेवा में लगे हैं। और तुम, सिर्फ सात-आठ रुपए के लिए देशद्रोह पर उतर आए। ये भी नहीं सोचा कि महंगाई बढ़ेगी तो अब्दुल की भी तो चूड़ी टाइट होगी।
सिर्फ भाजपाई ही नागरिक!
देश में असहमति की आवाजों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। सरकार के लिए यह घोषणा करना आसान होगा कि केवल भाजपा सदस्यों को ही नागरिकों के रूप में `पूर्ण अधिकार’ प्राप्त हैं। आज स्थिति यह है कि सरकार के आलोचकों और कठिनाइयों के बारे में चिंता व्यक्त करने वाले नागरिकों को देश के लिए लगातार खतरा या आतंकवादी करार दिया जा रहा है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक सहिष्णुता जैसे शब्द अब सिर्फ किताबों में ही हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)

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