देश की सबसे बड़े शिक्षा बोर्डों में से एक सीबीएसई लगातार सवालों के घेरे में है। पिछले कुछ सालों में परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी कई डिजिटल गड़बड़ियां सामने आई हैं, लेकिन इस साल जब रिजल्ट जारी भी नहीं हुआ था तब से लेकर सीबीएसई बोर्ड में विवाद चल रहा है जो अभी तक रुका नहीं है। मैथ्स के पेपर में रिक एस्टली के सरप्राइज लिंक, इतिहास के पेपर में ओरी के क्यूआर कोड और अब ओएसएम सिस्टम से जुड़े विवाद ने परीक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
लगातार सामने आ रही कभी न खत्म होने वाली परेशानी ने न केवल बोर्ड को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के बीच बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता भी बढ़ा दी है। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग रही हैं, लेकिन इन सभी घटनाओं का एक असर देखने को मिला है। छात्रों और अभिभावकों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि परीक्षाओं के संचालन, उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और परिणामों की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल सिस्टम कितने भरोसेमंद, सुरक्षित और लगातार सही तरीके से काम करने वाले हैं। बोर्ड को लेकर सबसे पहला विवाद १२वीं के मैथ्स पेपर के दौरान सामने आया था, जब छात्रों ने दावा किया कि पेपर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करने से उन्हें रिक एस्टली के मशहूर गाने नेवर गोना गिव यू अप पर रीडायरेक्ट कर दिया गया।
ओरी से जुड़ा विवाद
बोर्ड के इस विवाद ने बॉलीवुड को भी नहीं छोड़ा। रिक रोल वाली घटना के बाद इतिहास के पेपर में कुछ इसी तरह का मामला सामने आया। छात्रों ने आरोप लगाया कि एक अन्य क्यूआर कोड सोशल मीडिया पर्सनैलिटी ओरी से जुड़े प्लेटफॉर्म पर लेकर जा रहा है। इस दावे को एक बार फिर ऑनलाइन भारी समर्थन मिला, जिससे परीक्षा अवधि के दौरान भ्रम की स्थिति और बढ़ गई।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम
अभी इन विवादों की आग ठंडी र्भी नहीं हुई थी कि रिजल्ट जारी हो गया। इसके बाद से एक नया विवाद ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर शुरू हो गया। सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के तहत छात्रों को पुनर्मूल्यांकन या सत्यापन के लिए आवेदन करने से पहले अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई कॉपी उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन इस साल कई छात्रों ने शिकायत की कि उन्हें मिली उत्तर-पुस्तिकाओं धुंधली थीं, कुछ में पन्ने गायब थे, जबकि कुछ को अधूरी उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं। कुछ मामलों में तो छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी उत्तर-पुस्तिकाओं की कॉपियों में दूसरे विषयों के पन्ने भी जुड़े हुए थे।
