– सड़कों पर संकट, मंचों पर एआई
-मुंबई के सामने विकास का विरोधाभास
जेदवी / मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र को वैश्विक स्तर का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और नवाचार केंद्र बनाने के दावे एक बार फिर जोर-शोर से किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में मुंबई टेक वीक २०२६ के दौरान एमएमआरडीए और टेक एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन ऑफ मुंबई (टीइएएम) के बीच सामंजस्य करार (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस करार को मुंबई महानगर क्षेत्र में विश्वस्तरीय स्टार्टअप और एआई इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।
एमएमआरडीए के महानगर आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी तथा टीइएएम के सह-संस्थापक अक्रित वैश और हर्ष जैन की उपस्थिति में हुए इस समझौते के तहत एआई जॉब फेयर, ग्लोबल वैâपेबिलिटी सेंटर, हैकाथॉन और निवेशकों से जुड़ाव जैसे कई उपक्रम शुरू करने की घोषणा की गई है। साथ ही महाराष्ट्र इनोवेशन सिटी और मुंबई ३.० को नई दिशा देने का दावा भी किया गया है।
हालांकि, इन बड़े-बड़े दावों के बीच मुंबईकरों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर पहले से ही ट्रैफिक जाम, बढ़ती महंगाई, अधूरी आधारभूत सुविधाओं, जलभराव, और रोजगार संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में एआई और स्मार्ट सिटी के सपनों से आम नागरिकों को वास्तविक राहत कब मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं है।
एमएमआरडीए और टीइएएम द्वारा एआई, मोबिलिटी टेक, फिनटेक, अर्बन एनालिटिक्स और स्मार्ट सिटी विकास जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम करने की बात कही गई है। लेकिन मुंबई में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति को लेकर लगातार प्रश्न उठते रहे हैं। नागरिकों का मानना है कि तकनीकी विकास की योजनाओं के साथ-साथ यातायात, जल निकासी, किफायती आवास और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी समान गंभीरता से काम होना चाहिए।
