वह मारता भी है,
भरोसा भी देता है,
सुरक्षा की गारंटी के बीच
डटे रहने की बात करता है।
अभी-अभी कल
हिंदुस्तान के कान में
एक अच्छा सा शब्द गिरा—
‘मदद’।
सबने सुना,
हमने भी।
जिसका अर्थ होता है
फायदा।
फायदे के सिवा
वह कुछ नहीं करता।
उसे फायदे से प्यार है,
वह फायदे का यार है,
वह बाजार का मास्टर है।
हमें पुचकारता है,
फायदा कमाता है,
निकल जाता है
और फेंक देता है
संवेदनहीन शब्द—
‘मदद’
हमारे मुंह पर।
हम उसे लेकर
उछलते हैं,
कूदते हैं,
और गारंटी कर लेते हैं
सुरक्षा की।
यह एक सिलसिला है
जो चल रहा है,
सूरज ढल रहा है
कुछ दिनों से
हमारी राजनीति में,
सौदा बनकर।
-अन्वेषी
