श्रीकिशोर शाही
(बुंगा बुंगा-२५)
लंबे इंतजार और कानूनी लड़ाई के बाद, आखिरकार २०१९ में सिल्वियो बर्लुस्कोनी पर लगा राजनीतिक प्रतिबंध खत्म हो गया। उनके समर्थकों को लगा कि ‘कावलियरे’ (शूरवीर) फिर से अपने पुराने अंदाज में इटली की सत्ता पर राज करेगा। २०२२ के आम चुनावों में, ८६ वर्ष की उम्र और चरमराती सेहत के बावजूद, बर्लुस्कोनी ने एक बार फिर चुनावी मैदान में ताल ठोंक दी और शानदार जीत हासिल करके इटली की संसद (सीनेट) में अपनी ऐतिहासिक वापसी की। नौ साल बाद वे फिर से उसी संसद में खड़े थे, जहां से उन्हें कभी अपमानित करके निकाला गया था। लेकिन यह वापसी वैसी बिल्कुल नहीं थी जैसी उन्होंने सोची थी। इटली अब बदल चुका था। उनके अपने ही द्वारा बनाए गए दक्षिणपंथी गठबंधन में अब वे ‘लीडर’ नहीं रहे थे। इटली की नई राजनीतिक सनसनी और मौजूदा प्रधानमंत्री ‘जॉर्जिया मेलोनी’ ने उनकी जगह ले ली थी। बर्लुस्कोनी अब ‘किंग’ नहीं, बल्कि महज एक छोटे से ‘पार्टनर’ बनकर रह गए थे। जब वे संसद में बोलते थे तो इटली की नई पीढ़ी के लिए वे एक गंभीर राजनेता से ज्यादा एक ‘मीम’ या बीते हुए कल का एक पुराना मजाक बन चुके थे।
उनका वह पुराना जादुई चार्म अब काम नहीं कर रहा था। लोग उनकी पुरानी ‘बुंगा बुंगा’ पार्टियों और घोटालों को भूल चुके थे और उनकी जगह नए राजनीतिक मुद्दों ने ले ली थी। बर्लुस्कोनी को अपने जीवन के अंतिम दिनों में यह कड़वा सच स्वीकार करना पड़ा कि वे अब एक ऐसे बूढ़े शेर की तरह थे, जिसके पास दहाड़ तो बाकी थी, लेकिन जंगल पर उसका राज हमेशा के लिए खत्म हो चुका था। समय ने उन्हें उस मुकाम पर ला खड़ा किया था, जहां से आगे अब केवल एक ही दरवाजा बचा था—मौत का दरवाजा।
(शेष अगले अंक में)
